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जीएसटी काउंसिल की बैठक में राजस्व बढ़ाने पर विचार करेगी सरकार,आम जनता पर पड़ सकती है महंगाई की मार....
Posted by : achhiduniya
11 December 2019
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की बैठक अगले सप्ताह 18 दिसंबर
को होने वाली है। जीएसटी के सभी फैसले जीएसटी काउंसिल में ही लिये जाते हैं। यह
बैठक ऐसे समय हो रही है जबकि जीएसटी संग्रह उम्मीद से कम रहा है और कई राज्यों का
मुआवजा भी लंबित है। राज्य उन्हें जल्द से जल्द इसकी भरपाई किये जाने की मांग कर
रहे हैं। केन्द्र और राज्यों के अधिकारियों के एक समूह ने मंगलवार को बैठक कर
जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने की अपनी सिफारिशों को अंतिम रुप दिया। इसमें कई
विकल्पों पर विचार किया गया जिनमें से एक यह है कि पांच प्रतिशत की दर को बढ़ाकर 8
प्रतिशत और 12 प्रतिशत की दर को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया जाये। इसके अलावा कई दरों
में बदलाव किया जा सकता है।
संभावना है कि रॉ सिल्क, लग्जरी
हेल्थकेयर,
हाई वैल्यूम होम लीजिंग, ब्रांडेड सीरियल्स, पिज्जा, रेस्टोरेंट, क्रूज शिपिंग, प्रिंट एडवरटाइजिंग, एसी
ट्रेन टिकट्स,
ऑलिव ऑयल जैसे दर्जनों ऐसी चीजों के रेट में
बदलाव पर चर्चा की जा रही है यानी इनकी दरों में बढ़ोतरी करके जीएसटी राजस्व
बढ़ाने पर विचार हो रहा है। काउंसिल की बैठक में जीएसटी दरों को आपस में विलय कर
उनकी संख्या मौजूदा चार स्लैब से घटाकर तीन भी की जा सकती है। काउंसिल विभिन्न
छूटों पर भी फिर से गौर कर सकती है और यह भी देखेगी कि क्या कुछ सेवाओं पर उपकर
लगाया जा सकता है। इसके अलावा जीएसटी स्लैब में भी बदलाव करने की चर्चा है। सबसे
निचला स्लैब,
जो 5 फीसदी
वाला स्लैब है उसको बढ़ाकर 6 से 8 फीसदी की सिफारिश राज्यों ने की है।
जीएसटी के तहत इस समय मुख्यत:
चार दरें-पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 और 28 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 28 प्रतिशत की श्रेणी में आने वाली माल एवं सेवाओं पर उपकर भी लिया
जाता है। यह उपकर एक से लेकर 25 प्रतिशत के दायरे में लगाया
जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से नवंबर की अवधि में केन्द्रीय जीएसटी
प्राप्ति 2019- 20 के बजट अनुमान से 40 प्रतिशत कम रही है। इस अवधि में वास्तविक
सीजीएसटी संग्रह 3,28,365
करोड़ रुपये रहा है जब कि बजट अनुमान 5,26,000 करोड़ रुपये रखा गया है।


