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- सुस्ती के मकड़ जाल में फंसी अर्थव्यवस्था का संचालन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से और मंत्रियों के पास कोई शक्ति नहीं होना है.... RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन
सुस्ती के मकड़ जाल में फंसी अर्थव्यवस्था का संचालन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से और मंत्रियों के पास कोई शक्ति नहीं होना है.... RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन
Posted by : achhiduniya
08 December 2019
RBI
के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा, कहां गलती हुई है यह समझने के लिए हमें मौजूदा सरकार के
केंद्रीकृत प्रकृति को समझने की जरूरत है। केवल फैसला ही नहीं, बल्कि विचार और योजना पर निर्णय भी प्रधानमंत्री के कुछ नजदीकी
लोग और पीएमओ के लोग लेते हैं। पार्टी
के राजनीतिक तथा सामाजिक एजेंडे के लिए तो यह सही है, लेकिन आर्थिक सुधारों के मामलों में यह काम नहीं करता है, जहां ऐसे लोगों को यह पता नहीं कि राज्य स्तर से इतर केंद्र
स्तर पर अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की गठबंधन भले ही ढीला हो सकता
है,
लेकिन उन्होंने लगातार अर्थव्यवस्था के उदारीकरण
का रास्ता चुना। राजन ने कहा, मंत्रियों के शक्तिहीन होने के
साथ-साथ सरकार का बेहद अधिक केंद्रीकरण और दृष्टिकोण की कमी यह सुनिश्चित करता है
कि पीएमओ के चाहने पर ही सुधार के प्रयास की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
रीयल एस्टेट
और बुनियादी ढांचा क्षेत्र गहरे संकट में हैं। इसी तरह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां
(एनबीएफसी) भी दबाव में हैं। एनबीएफसी में संकट खड़ा होने और बैंकों में फंसा कर्ज
बढ़ने की वजह से अर्थव्यवस्था में रिण संकट पैदा हुआ है। राजन ने कहा है कि गैर-
बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी की संपत्तियों की गुणवत्ता की समीक्षा की
जानी चाहिए। कॉरपोरेट और परिवारों को दिया गया कर्ज बढ़ रहा हैं। वित्तीय क्षेत्र
के कई हिस्से गंभीर दबाव में हैं। बेरोजगारी के मामले में उन्होंने कहा कि युवाओं
के बीच यह बढ़ रही है। इससे युवाओं के बीच असंतोष भी बढ़ रहा है। घरेलू उद्योग जगत
नया निवेश नहीं कर रहा है और यह स्थिति इस बात का पुख्ता संकेत देती है कहीं कुछ
बहुत गलत हो रहा है।
राजन ने भूमि अधिग्रहण, श्रम
कानूनों, स्थिर कर और नियामकीय प्रशासन, कर्ज
में फंसे डेवलपर्स का दिवाला प्रक्रिया के तहत तेजी से समाधान, दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बनाये रखना और किसानों को
जरूरी सामान और वित्त सुविधायें उपलब्ध कराना जरूरी है। राजन ने पूंजी लाने के
नियमों को उदार बनाने, भूमि और श्रम बाजारों में
सुधार तथा निवेश एवं ग्रोथ को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने सरकार से
प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने तथा घरेलू क्षमता में सुधार लाने के लिए विवेकपूर्ण
ढंग से मुक्त व्यापार समझौते में शामिल होने का आग्रह किया।


