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अब एलियंस (गर्भवती महिलाएं) को बर्थ टूरिज्म के लिए अस्थायी बी-1 और बी-2 वीजा जारी नहीं करेगा अमेरिका...
Posted by : achhiduniya
25 January 2020
बर्थ टूरिज्म अमेरिका समेत कई देशों में तेजी से
बढ़ रहा है। अमेरिकी कंपनियां इसके लिए विज्ञापन भी देती हैं। विज्ञापनों के
मुताबिक, ये कंपनियां होटल के कमरे और चिकित्सा सुविधा के लिए 80,000
डॉलर तक वसूलती हैं। रूस और चीन जैसे देशों से कई महिलाएं अपने बच्चे को जन्म देने
के लिए अमेरिका आती हैं। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही अमेरिका
इस तरह के चलन के खिलाफ कदम उठा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने
आव्रजन के खिलाफ लड़ाई में नया मोर्चा खोल दिया है। अमेरिका अब वीजा को लेकर कुछ
नई पाबंदियां लगाने की योजना बना रहा है। ट्रंप प्रशासन ने फैसला लिया है कि बच्चों
को जन्म देने के लिए अमेरिका आने वाली गर्भवती महिलाओं को वीजा देने पर पाबंदी
लगाई जाएगी।
ट्रंप प्रशासन के दो अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्रालय की ओर से
जारी किए जा रहे नए वीजा नियम शुक्रवार से प्रभावी हो जाएंगे। व्हाइट हाउस की ओर
से जारी बयान में कहा गया है कि गर्भवती महिलाएं बच्चों को जन्म देने के लिए
अमेरिका आती हैं ताकि उनके बच्चों को यहां की नागरिकता मिल सके। व्हाइट हाउस की
प्रवक्ता स्टेफनी ग्रिशम ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता की अहमियत की रक्षा करना
जरूरी है। अब एलियंस (गर्भवती महिलाएं) को बर्थ टूरिज्म के लिए अस्थायी बी-1 और
बी-2 वीजा जारी नहीं किया जाएगा। स्टेफनी ने कहा कि अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के
साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बर्थ टूरिज्म पर रोक लगाने के
लिए वीजा नियमों में नई पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
बर्थ टूरिज्म इंडस्ट्री से देश के अस्पतालों
पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। नए नियम से गर्भवती महिलाओं के लिए टूरिस्ट वीजा पर
यात्रा करना कठिन होगा। नए वीजा नियमों के एक मसौदे के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को अमेरिकी वीजा हासिल करने के लिए काउंसिलर
ऑफिसर को समझाना होगा कि अमेरिका आने का उनके पास दूसरा वाजिब कारण है। प्रशासन
आव्रजन के सभी प्रारूपों पर पाबंदी लगा रहा है, लेकिन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खासतौर पर जन्मजात नागरिकता के मुद्दे पर कड़ा रुख
अपनाया है। इसके तहत गैर अमेरिकी नागरिकों के बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने के
साथ मिलने वाली नागरिकता के अधिकार को खत्म करना है।


