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- आखिर गूगल हैकर्स को क्यू देता है पनिशमेंट के बदले रिवॉर्ड....?
Posted by : achhiduniya
29 January 2020
गूगल ने एक ऑफिशल ब्लॉग पोस्ट में कहा, 2020 के बाद से ही हमने अपने VRPs को अडिशनल गूगल प्रॉडक्ट एरिया के लिए बढ़ा दिया है, जिसमें क्रोम, ऐंड्रॉयड और प्रॉडक्ट्स के गलत
इस्तेमाल को शामिल किया गया है। हमने गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद पॉप्युलर थर्ड
पार्टी ऐप्स को भी इसमें कवर किया है। इसकी मदद से किसी ऐप में मिलने वाली खामियों
और कमियों के बारे में ऐप डिवेलपर्स को बताया जाएगा और गड़बड़ियों को फिक्स किया
जाएगा। तब से हम 21 मिलियन डॉलर हैकर्स को रिवॉर्ड के तौर पर दे चुके हैं। गूगल ने
कहा कि रिसर्चर्स की ओर से अब तक की सबसे ज्यादा 5 लाख डॉलर (करीब 3.56 करोड़
रुपये) की रकम चैरिटी के
लिए दी गई है। रिवॉर्ड्स को लेकर गूगल ने कहा कि रिवॉर्ड
का मैक्सिमम बेसलाइन अमाउंट क्रोम के लिए 5,000
डॉलर से बढ़ाकर 15,000 डॉलर कर दिया गया है। वहीं, हाई क्वॉलिटी रिपोर्ट्स के लिए मैक्सिमम रिवॉर्ड अमाउंट 15,000 डॉलर से बढ़ाकर अब 30,000
डॉलर कर दिया गया है। ब्लॉग में गूगल ने लिखा, क्रोम
फज्जर प्रोग्राम में फज्जर्स की ओर से मिलने वाले बग्स के लिए
अडिशनल बोनस भी डबल
करके 1000 डॉलर कर दिया गया है। कंपनी के वल्नरेबिलिटी रिवॉर्ड प्रोग्राम्स 'Vulnerability Reward
Programs' (VRPs) में हैकर्स को गूगल प्रॉडक्ट्स में सिक्यॉरिटी
फ्लॉ और बग्स का पता लगाने के बदले रिवॉर्ड दिए जाते हैं। इन प्रॉडक्ट्स में गूगल
क्रोम से लेकर ऐंड्रॉयड तक शामिल हैं और ऐसा करने के पीछे गूगल का मकसद अपने
प्रॉडक्ट्स को यूजर्स के लिए सेफ बनाना है।


