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- “तान्हाजी...द अनसंग वॉरियर” मराठा शूरवीरो की दास्ता फिल्म की जुबानी....
Posted by : achhiduniya
11 January 2020
फिल्म की कहानी में आपको मराठा साम्राज्य के उन
शूरवीर योद्धाओ से रूबरू कराने की कोशिश की गई है जिन्होने अपनी वीरता से दुश्मनों
के दांत खट्टे कर दिए थे। 17वीं
शताब्दी के उत्तरार्ध का जब बांके मराठे हिंदुस्तान के मुग़ल शहंशाह औरंगज़ेब के
सामने डट कर खड़े हो गए थे,लेकिन दिल्ली के तख़्त की ताक़त
कभी कम ही नहीं होती थी। बस उनकी राह का रोड़ा था कोंढाणा का किला जिसको जीतकर मुग़ल
सेना आराम से दक्षिण की तरफ कूच कर सकती थी।
ऐसे में शिवाजी (शरद केलकर) को ना
चाहते हुए भी अपने सबसे विश्वासपात्र योद्धा तान्हाजी मालुसरे (अजय देवगन) को उनके
बेटे की शादी से बुलाना पड़ता है और अब
उनका सामना एक बेहद ज़िद्दी और अहमक मुग़ल सिपहसालार उदयभान राठौर (सैफ अली खान) से
होता है। फिल्म
की शुरुआत होती है जब कुछ मराठा सिपाही एक पहाड़ी के ऊपर से हमलावर होते हैं। यह
पूरा सीक्वेंस हिंदी सिनेमा में विजुअल इफेक्ट्स के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
इससे पहले किसी भी फिल्म में इस तरह का टेक्निकल परफेक्शन हासिल नहीं किया गया था।
तान्हाजी में एक और देखने लायक चीज़ है सैफ अली खान की ज़बरदस्त अदाकारी।
लम्बे
अर्से के बाद उनकी एक विलेन के तौर पर वापसी हुई है और उन्होंने इस मौके को क्या
खूब भुनाया है। तान्हाजी के सामने ना सिर्फ उन्होंने अपना कद बनाये रखा है बल्कि
अपनी विविधता और रिस्क लेने की क्षमता से प्रभावित भी किया है। तान्हाजी में
निर्देशक ओम राउत ने क्रिएटिव लिबर्टी भी ली है। 134 मिनट की यह फिल्म आपको काफी
आनंदित करेगी और अगर कहीं आप हिंदी में नयी चीज़ देखने के शौक़ीन हैं तो तान्हाजी ना
देखने की कोई वजह नहीं बनती है। डायरेक्टर:-ओम राउत,संगीत:-
अजय-अतुल,कलाकार:-अजय देवगन, सैफ अली
खान, काजोल, शरद केलकर। तान्हाजी सच्चाई के
काफी क़रीब ले गई है।


