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- दोषियो को बचाने गवर्नर और राष्ट्रपति को ही कटघरे में खड़ा कर दिया निर्भया रेप व मर्डर केस दोषी मुकेश की वकील अंजना प्रकाश ने लगाए गंभीर आरोप....
दोषियो को बचाने गवर्नर और राष्ट्रपति को ही कटघरे में खड़ा कर दिया निर्भया रेप व मर्डर केस दोषी मुकेश की वकील अंजना प्रकाश ने लगाए गंभीर आरोप....
Posted by : achhiduniya
28 January 2020
निर्भया मामले में दोषी मुकेश ने राष्ट्रपति के
पास दया याचिका खारिज होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। साथ ही 1 फरवरी को
होने वाली फांसी के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। निर्भया केस में दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार
को फैसला सुनाएगा। याचिका में राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के आदेश को
चुनौती दी गई थी। अब इस मामले में दोषी मुकेश की वकील अंजना प्रकाश का कहना है कि
राष्ट्रपति ने दया याचिका पर अपने दिमाग से काम नहीं लिया है।
वहीं तीन सदस्यीय
बेंच की अगुवाई कर रही जस्टिस भानुमति ने कहा कि राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा
का कोर्ट के पास सीमित अधिकार है। कोर्ट को केवल यह देखना है कि राष्ट्रपति के पास
केस से जुड़े जरूरी दस्तावेज रखे गए थे या नहीं। सुनवाई में पहले मुकेश की एडवोकेट
अंजना प्रकाश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट गौर करे कि क्या दया याचिका के निपटारे में
पूरी प्रकिया का पालन हुआ है। उन्होंने कहा, मेरे
मुवक्किल ने माना है कि वो बस में चल रहा था पर उसकी वजह से निर्भया की जान नहीं
गई। वो रेप में शामिल नहीं था। फोरेंसिक
एविडेंस भी मेरी इस दलील के पक्ष में है। अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने
फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मानवीय फैसलों में चूक हो सकती है। जीवन और
व्यक्तिगत आजादी से जुड़े मसलों को गौर से देखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि माफी का अधिकार किसी
की व्यक्तिगत कृपा न होकर, संविधान के तहत दोषी को मिला अधिकार है। उन्होंने कहा कि
राष्ट्रपति को मिले माफी के अधिकार का बहुत
जिम्मेदारी से पालन जरूरी है। मुकेश की ओर
से पेश वकील ने कहा कि हम न्यायिक फैसले की समीक्षा का अधिकार नहीं रखते, लेकिन
मौत के मामले की उनको संविधान के तहत समीक्षा का अधिकार है। मुकेश की वकील ने कहा, गवर्नर और राष्ट्रपति दया याचिका के मामले में अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
लोकतांत्रिक राष्ट्र में मुकेश की दया याचिका तथ्यों पर बगैर ध्यान दिए मनमाने ढंग
से खारिज की गई है। मुकेश की वकील अंजना प्रकाश ने दलील दी कि दया याचिका को मनमाने
ढंग से जल्दबाजी में खारिज किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप ऐसा कैसे कह सकती
है कि राष्ट्रपति ने दया याचिका पर अपने विवेक से काम नहीं लिया? कोर्ट
के इस सवाल पर मुकेश की वकील ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने विवेक से काम नहीं लिया
क्योंकि उनके सामने रिकॉर्ड्स नहीं रखे गए।



