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- NPR प्रक्रिया में जान-बूझकर गलत या जानकारी न देने पर लगेगा 1000 रुपये जुर्माना...
Posted by : achhiduniya
16 January 2020
बीते दिसंबर में सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में लेखिका अरुंधति रॉय ने लोगों से कहा था कि जब अधिकारी जानकारी मांगने के लिए घर आएं तो उन्हें गलत जानकारी दें। रॉय ने कहा कि जब अधिकारी एनपीआर के लिए आपके घर पर आएं तो अपने नाम रंगा-बिल्ला, कुंगफू-कट्टा बता दें। एनपीआर के अधिकारियों ने भी कहा कि प्री-टेस्ट में किसी भी व्यक्ति ने अपने आधार, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट विवरण साझा करने में कोई संकोच नहीं किया। कुछ लोगों को बस पैन नंबर देने में आपत्ति थी। हट सकता है पैन नंबर का ऑप्शनएक अधिकारी ने कहा,आपत्ति के कारण हमने पैन कार्ड का कॉलम हटाने का फैसला किया है। इस प्री-टेस्ट में 73 जिले रखे गए थे। इसमें करीब 30 लाख लोगों का सैंपल लिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 80% मामलों में, जवाब देने वालों ने स्वेच्छा से विवरण दिए, लेकिन पैन विवरण साझा करने में संकोच किया, जिसके बाद हमने एनपीआर में इस कॉलम को हटाने का फैसला किया है।
केंद्र
सरकार ने बुधवार को जानकारी दी थी कि देश भर में इस साल होने वाली जनगणना के पहले
चरण के साथ ही नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) भी लागू
कर दिया जाएगा। वहीं अब एनपीआर (NPR) प्रक्रिया के साथ असहयोग को लेकर बढ़ती झड़प के बीच, गृह मंत्रालय की ओर
से जानकारी दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति एनपीआर के लिए जानकारी देने से इनकार करता
है या जान-बूझकर गलत जानकारी देता है तो अधिकारी नियम के मुताबिक उस व्यक्ति पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगा सकते हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने
जानकारी दी कि नागरिकता नियम के नियम 17 के
मुताबिक गलत जानकारी देने पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया
जाएगा। हालांकि, अधिकारी ने यह भी बताया कि इस प्रावधान का
इस्तेमाल 2011 और 2015 के एनपीआर में नहीं किया गया
था। वहीं गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर कहा है कि आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट
और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर का विवरण प्रदान करना अनिवार्य नहीं है। एनपीआर की
प्रक्रिया जनगणना के पहले चरण के साथ 1 अप्रैल
से शुरू होगी।

