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- फार्मा कंपनी ने सरकार से API प्राइस कंट्रोल में ढील की मांग...
Posted by : achhiduniya
18 February 2020
कारोना वायरस की वजह से सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। देश में पैरासिटामोल की कीमतों में 40 फीसदी से अधिक का इजाफा हो चुका है। वहीं, बैक्टिरियल इन्फेक्शन से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा एजिथ्रोमाइसिन भी 70 फीसदी तक महंगा हो चुका है। फार्मा कंपनी Zydus Cadila के चेयरमैन पंकज पटेल ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अगर अगले महीने की पहले सप्ताह तक दवाओं की सप्लाई दुरुस्त नहीं की गई तो इससे अप्रैल महीने में फार्मा इंडस्ट्री दवाओं की भारी कमी से जूझ सकता है। चीन कारोनो वायरस को देखते हुए कई तरह के प्रतिबंध के बाद दवाएं बनाने में इस्तेमाल होने वाले एपीआई की कीमतें बढ़ गईं है।
संभावना है कि एपीआई की मांग छोटी और मध्यम अवधि में बढ़ सकती
है। दुनियाभर में सबसे अधिक जेनेरिक दवाएं
भारत से ही निर्यात की जाती हैं। अमेरिकी
बाजार तक में इस्तेमाल होने वाली कुल दवाओं का 12 फीसदी उत्पादन भारत में ही किया
जाता है। इन दवाओं को बनाने के लिए API की जरुरतों
को पूरा करने के लिए चीन पर निर्भर रहता है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार API (Active
Pharamsuticals Ingredient) इंडस्ट्री
को राहत दे सकती है। सूत्रों से प्राप्त
जानकारी के मुताबिक, देश की फार्मा इंडस्ट्री ने लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी पर काम शुरू करने की मांग की है ताकि
चीन पर उसकी निर्भरता कम हो जाए। कोरोना वायरस के खतरे के बीच फार्मास्यूटिकल
विभाग ने इंडस्ट्री के साथ बैठक की है। API का
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार से मांग की गई है कि इसके लिए लांग टर्म रणनीति
पर तुरंत काम शुरू किया जाए।
बता दें कि दवाएं बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर
एपीआई का इस्तेमाल किया जाता है। इंडस्ट्री ने चीन पर से निर्भरता कम करने के लिए
रियायत की मांग की है। देश में चीन से जरूरत का करीब 80 फीसदी API का आयात होता है। इंडस्ट्री ने API प्राइस कंट्रोल में ढील की मांग की है। सूत्रों के हवाले से
मिली जानकारी के मुताबिक इंडस्ट्री का कहना है कि शुरुआती 3-5 साल के लिए टैक्स
हॉलिडे मिलना चाहिए। इन बातों की राहत दे सरकारइसके साथ ही इंडस्ट्री की मांग है
कि पर्यावरण मंजूरी 6 महीने के अंदर मिलनी चाहिए। एक ही लाइसेंस पर अलग प्रोडक्ट
मिक्स बनाने की भी इज़ाज़त मिले। चीन में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट 20-30 फीसदी सस्ता
है जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार को देश में घरेलू API इंडस्ट्री को राहत देनी चाहिए।


