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- आप की जीत बीजेपी मझधार और कांग्रेस की हार क्यू....?
Posted by : achhiduniya
11 February 2020
दिल्ली में रहने वाले वोटरों के लिए पानी, बिजली, शिक्षा और चिकित्सा जैसे मुद्दे ज़्यादा अहमियत रखते हैं। इन मुद्दों का बोलबाला आम आदमी पार्टी के कैंपेन में दिखा। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाया । पड़ोसी मुल्क में अल्पसंख्यकों को मदद से लिए नागरिकता संशोधन कानून बनाया और मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक को गैर-कानूनी घोषित किया। वोटर इतना भी भोला नहीं है कि वह स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों में फर्क कर सके। दिल्ली बहुत हद तक शहरी क्षेत्र है। दिल्ली में देश के हर राज्य के लोग रहते हैं। यह महानगर है। यानी एक ऐसा क्षेत्र जिसमें कमजोर होती अर्थव्यवस्था का सबसे ज़्यादा असर देखने को मिलना चाहिए। ऐसा हुआ भी है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और बड़े नेता भले ही ये बोलें कि देश में सबकुछ ठीक है।
हम तेज़ी से विकास कर रहे हैं। लेकिन आर्थिक आकंड़े कुछ और ही सच्चाई बयां करते हैं। देश पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में असर मार्केट में भी दिखता है। और यहां से माहौल बनता है कि सबकुछ ठीक नहीं है। यह पहलू बीजेपी के लिए भारी पड़ा है। कांग्रेस ने इस चुनाव में हिस्सा लिया। इसके अलावा कुछ नहीं किया। ना कोई रणनीति और ना ही कोई नेता। एक वक्त पर दिल्ली में लगातार तीन बार सत्ता पर काबिज रहने वाली पार्टी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि इसका फायदा किसको हुआ? बीजेपी के वोट तो बढ़े लेकिन कुछ सीटों पर कांग्रेस के कमज़ोर प्रदर्शन ने आम आदमी पार्टी के लिए राह आसान कर दी। भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र में कई लोकलुभावने वादे थे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी पार्टियों पर किए गए हमले बेहद ही नकारात्मक चरित्र के थे।
अरविंद केजरीवाल के लिए आतंकवादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल, किसी भी दिल्ली वोटर के गले नहीं उतरा। इसके अलावा पार्टी ने आखिरी 10 दिनों में चुनाव प्रचार को शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन पर केंद्रित करने की कोशिश की। इस चुनाव में दिल्ली के लोगों को शायद एक बात समझ आ गई थी कि अगर वे बीजेपी को वोट देते भी हैं तो भी नरेंद्र मोदी दिल्ली के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। अब एक नज़र दिल्ली बीजेपी के नेताओं की सूची पर डाली जाए तो कोई भी नेता अरविंद केजरीवाल को चुनौती देता नहीं दिखता। ऐसे में बीजेपी विकल्प नहीं दे पाई।


