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- सिजेरियन या नार्मल डिलीवरी तो सुना है,जाने वाटर बर्थ डिलीवरी के बारे में खास बाते....?
Posted by : achhiduniya
16 February 2020
एक प्रसव के दौरान उतना दर्द होता है, जितना की हमारे शरीर की सारी हड्डिया एक साथ टूटने पर होगा। इसलिए
वाटर बर्थ डिलीवरी प्रसव तकनीक को अपनाया गया है ताकि प्रसव के समय मां को पीड़ा कम
हो। एक अध्यन में यह पाया गया है, कि वाटर बर्थ डिलीवरी में
नार्मल डिलीवरी से 40 प्रतिशत कम पीड़ा होती है। इसी के साथ साथ मां और शिशु दोनों
को ही इन्फेक्शन होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। वाटर बर्थ डिलीवरी प्रसव करवाने का एक प्रकार है, जैसे
सिजेरियन या नार्मल डिलीवरी में होता है। यह भी कहा जा सकता है, कि वाटर बर्थ डिलीवरी नार्मल डिलीवरी का ही एक आधुनिक प्रकार है, जिसके जरिए प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा को कम किया जा सकता
है। ऐसे किया जाता है।
वाटर बर्थ डिलीवरी से जो योनि में खिचाव होती है, वो भी कम हो जाती है, क्योंकि
गरम पानी के संपर्क में आने से टिश्यू बहुत सॉफ्ट हो जाते हैं। वाटर बर्थ डिलीवरी
के समय महिला गरम पानी में रहती है, जिसकी
वजह से शरीर में तनाव भी कम हो जाता है। वाटर बर्थ डेलिवरी का अर्थ यह है कि प्रसव
के दौरन मां के शरीर को गर्म पानी के एक टब में रखा जाता है और बच्चे का जन्म भी
उसी गर्म पानी में होता है। इस प्रक्रिया के लिए एक गुनगुने पानी का बर्थिंग पूल बनाया जाता है और इस पूरे पूल का तापमान एक जैसा रखने के लिए
इसमें कई उपकरण भी लगे रहते हैं।
जैसे कि इन्फेक्शन को रोकने के लिए वाटर प्रूफ उपकरण बर्थिंग पूल की क्षमता लगभग 400 लीटर होती है।
यह पूल तकरीबन ढाई से तीन फीट का हो सकता है। यह महिला के शरीर के अनुसार एडजस्ट
हो सकता है। प्रसव पीड़ा शुरू होने के तीन से चार घण्टे के बाद महिला को इसमें ले
जाया जाता है। शिशु का जन्म भी पानी के भीतर होता है।


