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- वैक्सीन की प्री बुकिंग कई अमीर देशों का वैक्सीन डोज बनने से पहले ही कब्जा....?
Posted by : achhiduniya
15 November 2020
दुनिया के कई अमीर देशों द्वारा कोरोना वैक्सीन की खुराक पहले ही बुक करवा लेने की वजह से लो एंड मिडिल इनकम वाले देशों को कोरोना वैक्सीन की डोज मिलने में देरी हो सकती है। ये देश पूरी तरह से अपनी जनता के टीकेकरण के लिए कोविड-19 वैक्सीन ग्लोबल एक्सेस फैसिलिटी (कोवैक्स) पर निर्भर होंगे। हालांकि, कोवैक्स भी इन देशों की सिर्फ 20 फीसदी आबादी के लिए कोरोना
वैक्सीन उपलब्ध कराने की स्थिति में होंगे। हाल ही में, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने कहा था साल 2024 तक हर किसी व्यक्ति को ही कोरोना की वैक्सीन लगाई जा सकेगी। पूनावाला ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया था कि धरती पर सभी के लिए कोरोना वायरस का टीका मिलने में कम से कम चार-पांच साल लग जाएंगे। दो साल यह देखने में लगेगा संक्रमण में वास्तव कितनी कमी आई है। सरकार से बातचीत के बाद पूनावाला ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि शुरुआत में वैक्सीन फ्रंटलाइन वर्कर्स और जोखिम वाले लोगों को दिया जाएगा। 130 करोड़ आबादी वाले देश में सबका टीकाकरण एक चुनौती होगी। कनाडा पहले से ही अपनी 3.8 करोड़ जनता के लिए लगभग 36 करोड़ डोज बुक करवा चुका है। इस तरह से कनाडा में रहने वाले हर एक व्यक्ति के लिए प्रति नौ डोज होंगी। वहीं, कनाडा की सरकार और 5.6 करोड़ वैक्सीन की डोज बुक कराने की योजना बना रहा है। इस तरह हर एक शख्स के हिस्से में 10 डोज से अधिक वैक्सीन आएंगी। अमेरिका ने भी पहले से सभी लोगों के लिए वैक्सीन की डोज की बुकिंग करवा ली है। अमेरिका अब तक 1.1 बिलियन डोज की बुकिंग करवा चुका है। जनसंख्या के हिसाब से एक अमेरिकी के हिस्से में तीन डोज आएंगे। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी अपने लोगों के लिए वैक्सीन की डोज बुक कराने में काफी आगे हैं। दोनों ही देशों ने अपने एक व्यक्ति के लिए कम से कम पांच डोज की बुकिंग करवा ली है। भारत ने 1.9 अरब वैक्सीन की डोज बुक करवा ली है। हालांकि, एक शख्स को यदि वैक्सीन की कम से कम दो डोज की जरूरत होती है, तो फिर लगभग 70 करोड़ डोज की कमी पड़ेगी। एक्सपर्ट्स की मानें तो अगले साल की शुरुआत में कोरोना वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है, लेकिन दुनिया के हर शख्स तक वैक्सीन के पहुंचने में चार साल का समय लग सकता है। इसके पीछे की वजह यह है कि कई अमीर देशों ने वैक्सीन की करोड़ों डोज पहले ही बुक करा लिए हैं। ऐसे में कई गरीब देशों की जनता के लिए काफी कम डोज बचेंगी।



