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- पेपर-प्लास्टिक से बेहतर क्यू हैं कुल्हड़ की चाय.....? फायदे जान कायल हो जाएंगे आप..
Posted by : achhiduniya
30 December 2020
हर दिन की शुरुवात चाय के साथ होने से मानो ताजगी और फुर्ती महसूस होने लगती है। चाय एक ऐसी चीज है, जो काम से थके हुए इंसान के लिए एनर्जी ड्रिंक का काम करती है। आप घर से बाहर चाय पीना पसंद करते हैं या कामकाजी होने के चलते ऐसा करना पड़ता है तो आपको सावधान रखने की जरूरत है। ज्यादातर दुकानों पर देखने में आता है कि चाय के लिए उपयोग किए जाने वाले कांच के
गिलासों को सही तरह से साफ नहीं किया जाता है, जिसकी वजह से बैक्टीरिया के संपर्क में आने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। अक्सर कांच,सिरेमिक, मेटल या डिस्पोजेबल कप-गिलास सेहत के लिए हानिकारक साबित होते है खास कर प्लास्टिक के कप जिनसे कैंसर जैसी घातक बीमारी के शिकार हो सकते है। वहीं मिट्टी के कुल्हड़ सींगल टाइम यूज किए जाते हैं, जिससे ये पूरी तरह से हाइजीनिक होते हैं। अब कई चाय की दुकानों पर कुल्हड़ में चाय परोसी जाती है और तोऔर
कुछ लोगों की तो फरमाइश ही होती है- कुल्हड़ वाली चाय,लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये ईको फ्रेंडली कुल्हड़ वाली चाय टेस्ट और हेल्थ
के लिए भी परफेक्ट होती है। कुल्हड़ में गर्मागर्म चाय डालते ही मिट्टी की सौंधी खूशबू उठती है। यह खुशबू हमें एक
खुशनुमा एहसास से भर देती है। कुल्हड़ में जो सूक्ष्म तत्व मौजूद होते हैं, वे हमारे शरीर की हड्डियों के लिए फायदेमंद होते हैं। दरअसल
मिट्टी में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है और कुल्हड़ भी मिट्टी से निर्मित
होता है, इसलिए इसमें चाय पीने से हमारे
शरीर को कुछ-न-कुछ मात्रा में
कैल्शियम मिलता है, जिससे हमारे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं। कुल्हड़ में चाय पीने से हमारा
डाइजेशन सिस्टम सही रहता है। चूँकि कुल्हड़ मिट्टी से बने होते हैं, इसलिए इनका कोई साइड इफेक्ट या बैड इफेक्ट नहीं होता। जबकि इसके उलट
ज्यादातर डिस्पोजेबल पॉली-स्टिरिन से बने होते हैं, ऐसे में
इनमें गरम चाय डालने पर इनमें मौजूद एसिड चाय के साथ पेट में चले जाते हैं और
आंतों में जमा हो जाते हैं, जिससे न सिर्फ पेट खराब होने का खतरा होता है, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। इंसानी शरीर में अम्लीय पैदा होने के चलते खट्टी
डकार और डायजेशन से जुड़ी कई तरह की
समस्याएं होती हैं। वहीं, कुल्हड़ क्षारीय गुण वाले होते हैं। इससे कुल्हड़ वाली चाय पीने के बाद पेट में
जलन की संभावाना भी कम होती है। मिट्टी से बने कुल्हड़ इको फ्रेंडली होते हैं, जिनका उपयोग करने के बाद फेंक दिया जाता है, जिससे ये फिर से मिट्टी में ही परिवर्तित हो जाते हैं, इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचता। साथ ही इससे लाखों
लोगों को रोजगार मिलता है। कुल्हड़, जिन्हें सिर्फ गांव में ही इस्तेमाल किया जाता था,
वो अब शहर में डिमांड में हैं। यहाँ तक कि अब हाई सोसायटीज में भी चाय पीने के लिए कुल्हड़ का इस्तेमाल किया जाने लगा है। खासकर
कोरोनाकाल में लोग एहतियातन घर से बाहर कुल्हड़ में ही चाय पीने को ज्यादा पसंद कर
रहे हैं। यहाँ तक कि कुल्हड़ में चाय पीने से मिलनेवाले हेल्थ बेनेफिट को देखते हुए अब तो हाई सोसायटी की फैमिलीज में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।





