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- कृषि विधेयक भ्रम और सच्चाई की कहानी सरकार की जुबानी....
Posted by : achhiduniya
10 December 2020
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने एक ट्वीट करके कृषि कानून पर फैलाए जा रहे भ्रम का खुलासा किया और साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि आखिरकार सच क्या है। 1 भ्रम:- कृषि बिल किसान विरोधी है। सच:- कृषि बिल किसान की आजादी है। वन नेशन-वन मार्किट से अब किसान अपनी फसल कहीं भी,किसी को और किसी भी कीमत पर बेच सकते हैं। अब किसान किसी पर भी निर्भर रहने
के बदले बड़ी खाद्य उत्पादन कंपनियों के साथ पार्टनर की तरह जुड़कर ज्यादा मुनाफा कमा पायेगा। 2 भ्रम:- किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) न देने के लिए कृषि बिल साजिश है। सच:- कृषि बिल का न्यूनतम समर्थन मूल्य से कोई लेना-देना ही नहीं है,एमएसपी मूल्य मिलता रहा है,मिलता रहेगा।3 भ्रम:- देश में अब मंडियों का अंत हो जाएगा। सच:- देश में मंडी व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।4 भ्रम:- किसान की जमीन पूंजीपतियों को दी जाएगी। सच:- बिल में साफ निर्देशित है कि किसानों की जमीन की बिक्री,लीज और गिरवी रखना पूरी तरह से निषिद्ध है। इसमें
फसलों का करार होगा,जमीन का करार नहीं होगा।5 भ्रम:-बड़ी कम्पनियाँ कॉन्ट्रैक्ट के नाम पर किसानों का शोषण करेंगी। सच:-करार से किसानों को निर्धारित दाम पाने की गारंटी मिलेगी,लेकिन किसान को किसी भी करार में बाँधा नहीं जा सकेगा। किसान किसी भी मोड़ पर बिना किसी पैनाल्टी के करार से निकलने को स्वतंत्र होगा।6 भ्रम:- बड़े कॉर्पोरेट का फायदा,किसानों का नुकसान। सच:-कई राज्यों में किसान सफलतापूर्वक बड़े कॉर्पोरेट के साथ गन्ना,कपास,चाय,कॉफी जैसे उत्पाद प्रोड्यूस कर रहे हैं। अब इससे छोटे
किसानों को बड़ा फायदा होगा। उनको गारंटीड मुनाफे के साथ ही टेक्नोलॉजी और उपकरण का भी लाभ मिलेगा। भ्रम और सच बताने के अलावा भी कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कई बातें कही। किसान फसल उगाने से पहले ही उपज के दाम तय कर सकते हैं। खरीदारों को समय पर भुगतान करना होगा वरना क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। किसान अपनी इच्छानुसार कभी भी समझौते को समाप्त कर सकते हैं।



