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- फिल्म सिटी पर खिचीं दो राज्यो में लकिर UP- CM और MH- CM आमने-सामने
Posted by : achhiduniya
02 December 2020
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के
मुंबई दौरे पर शिवसेना हमलावर है और वह लगातार कह रही है कि मुंबई की ‘फिल्म सिटी’ को कहीं और स्थापित करना
आसान नहीं और हम अपने व्यापार को कहीं और ले जाने नहीं देंगे। इस पर यूपी के सीएम
ने करारा जवाब दिया है। मुंबई फिल्म सिटी को कहीं और ले जाने के सवाल पर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम कहीं कुछ नहीं ले
जा रहे। मुंबई फिल्म सिटी मुंबई में ही काम करेगी। जबकि यूपी में नई फिल्म सिटी को नई आवश्यकताओं के अनुसार एक नए वातावरण में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि फिल्म उद्योग को मुंबई से बाहर ले जाने का उनका कोई इरादा नहीं है। हम किसी का निवेश नहीं छीन रहे हैं। कोई अपने साथ कुछ नहीं ले जा सकता। यह कोई पर्स नहीं है जिसे ले जाया सकता है। यह खुली प्रतिस्पर्धा है। जो सुरक्षित माहौल,बेहतर सुविधाएं और विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा
दे सकेगा। उसे निवेश
प्राप्त होगा। इसके अलावा सीएम ने कहा कि निर्माता,निर्देशक,एक्टर और फिल्म जगत के विभिन्न पक्षों के जानकारों के साथ भी फिल्म सिटी
को लेकर चर्चा हुई। ये फिल्म सिटी जेवर एयरपोर्ट से 6 किमी की दूरी पर हुई। यहां
से आगरा 1 घंटे की दूरी पर है। वहीं, मुंबई में उद्योगपतियों
से बातचीत के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फिल्म जगत से जुड़े हुए लोगों को
सरकार के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण में अपनी भागीदारी
देनी चाहिए। यह सरकारी प्रोजेक्ट
बनकर नहीं रहना चाहिए। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश
सरकार ने गौतम बुद्ध नगर में यमुना एक्सप्रेसवे के पास एक फिल्म सिटी स्थापित करने
के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी है। वहीं शिवसेना के सांसद संजय राऊत ने कहा कि पहले
भी ऐसी कोशिशें की गई हैं। मुंबई फिल्म सिटी जैसा कुछ भी कहीं भी स्थापित करना
आसान नहीं है। मुंबई का एक शानदार फिल्म इतिहास है। राउत ने कहा कि दक्षिण और
बंगाल में भी फिल्म उद्योग हैं। दक्षिणी सुपरस्टार रजनीकांत,नागार्जुन,चिरंजीवी ने भी हिंदी फिल्मों में काम किया है। इसके अलावा राज्यसभा सांसद
ने पूछा कि क्या योगी जी उन राज्यों का भी रुख करेंगे या सिर्फ मुंबई को निशाना
बनाया जा रहा है? इसके अलावा शिवसेना के अपनी मूल विचारधारा
भूल जाने के भाजपा के दावे पर उन्होंने कहा कि शिवसेना के हिंदुत्व की बजाय,बेरोजगारी,गिरती जीडीपी और अर्थव्यवस्था पर चर्चा
करें। राउत ने साथ ही यह भी कहा कि केंद्र को नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन
कर रहे किसानों का मुद्दा हल करने के लिए कदम उठाने चाहिए, जो
पिछले एक सप्ताह से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं।



