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- कृषि कानूनों वार्ता में भिड़े मंत्री और किसान,15 को होगी अगली बैठक....
Posted by : achhiduniya
08 January 2021
दिल्ली की सीमाओं पर भीषण ठंड के बावजूद पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के हजारों किसान एक महीने से
ज्यादा समय से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान कृषि कानूनों को
निरस्त करने,
फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी
गारंटी देने तथा दो अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस साल सितम्बर में
अमल में आए तीनों कानूनों को केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर
पर पेश किया है। सरकार का कहना है कि इन कानूनों के आने से बिचौलियों की भूमिका
खत्म हो जाएगी और किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकेंगे। दूसरी तरफ, प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि इन कानूनों से
एमएसपी का सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा और मंडियां भी खत्म हो जाएंगी तथा खेती बड़े
कारपोरेट समूहों के हाथ में चली जाएगी। विभिन्न विपक्षी दलों और अलग-अलग क्षेत्रों
के लोगों ने भी किसानों का समर्थन किया है, वहीं
पिछले कुछ हफ्ते में कुछ किसान संगठनों ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर तीनों
कानूनों को अपना समर्थन दिया है। सरकार ने पिछले महीने प्रदर्शनकारी किसान संगठनों
को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें नए कानून में सात-आठ संशोधन करने और एमएसपी की
व्यवस्था पर लिखित आश्वासन देने की बात कही गयी थी। तीन कृषि काननों को लेकर किसान नेताओं और
केंद्र सरकार के बीच जारी 8वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। जिसके बाद सरकार ने
15 जनवरी को अगले दौर की वार्ता का ऐलान किया है। बैठक के दौरान सरकार और किसान
नेताओं के बीच बहस भी हुई। ये उस वक्त
ज्यादा बढ़ गई जब किसान नेताओं ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानून बनाने के बाद कमेटी बनाने के लिए कहा इस दौरान किसानों ने एक नारा भी दिया-हम सरकार को हराएंगे, हम जीतेंगे' किसानों ने कहा कि ये कानून सरकार विरोधी है। हमने कहा कि हम कानूनों को निरस्त करने के अलावा कुछ नहीं चाहते हैं। हम किसी भी अदालत में नहीं जाएंगे। जब तक कानून निरस्त नहीं किए जाते हम लड़ना जारी रखेंगे। 26 जनवरी को हमारी परेड योजना के अनुसार होगी।



