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- मुर्दों को जमीन में दफनाने से जमीन का पानी अशुद्ध होगा..कब्रिस्तानों को लेकर छिड़ा विवाद...
Posted by : achhiduniya
14 January 2021
जापान में मुसलमानों की संख्या बढ़ने पर वहां के बहुसंख्यक बौद्ध समाज से उनका वैचारिक
टकराव शुरू हो गया है। कन्वर्ट हुए मुसलमान अपने लिए ज्यादा कब्रिस्तानों की मांग
कर रहे हैं। जबकि जापान की 99 फीसदी बौद्ध आबादी दाह संस्कार करती आई है। उनका
मानना है कि मुर्दों को जमीन में दफनाने से जमीन अशुद्ध हो जाएगी और वहां के लोग
सहूलियत के साथ पानी नहीं पी पाएंगे। Economist.Com के मुताबिक जापान की
वसेडा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तनाडा हिरोफुमी ने रिसर्च करके रिपोर्ट तैयार की है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में जापान में मुस्लिमों की
आबादी करीब 1
लाख 10 हजार थी, लेकिन 2019 में बढ़कर 2 लाख 30 हजार हो गई। इनमें 50 हजार जापानी लोग भी शामिल हैं जो धर्म बदलकर मुस्लिम बने हैं। मुस्लिमों की संख्या बढ़ने की वजह से जापान में मस्जिदों की संख्या बढ़कर 110 से ज्यादा हो गई है। जबकि 2001 में यह
संख्या केवल 24
थी। बीप्पू मुस्लिम एसोसिएशन के प्रमुख अब्बास
खान जापान में मस्जिदों की संख्या बढ़ने का स्वागत करते हैं। वे कहते हैं कि
मस्जिदों की संख्या बढ़ने के बावजूद मुस्लिमों को अब भी कई दिक्कतों का सामना करना
पड़ रहा है। जापान की आबादी करीब 12.6 करोड़
है। वहां के युवा शादी-विवाह के बजाय करियर पर ज्यादा फोकस करते हैं। इसके चलते
जापान की आबादी लगातार घटती जा रही है। इससे भविष्य में जापान में काम करने वाले
युवाओं की संख्या घटने का खतरा पैदा हो गया है। इस समस्या से निपटने के लिए जापानी
सरकार विदेशी वर्कर्स और स्टूडेंट्स को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं जापान की स्थितियों का फायदा उठाकर जमातियों ने भी वहां पर घुसपैठ कर
ली है। वे विदेशी स्टूडेंट्स और वर्कर्स बनकर वहां पहुंच रहे हैं और स्थानीय लोगों
को कन्वर्ट करने में लगे हैं। इसके साथ ही दूसरे देशों से मुस्लिमों को जापान में
बसाने का भी काम कर रहे हैं। बीप्पू मुस्लिम एसोसिएशन के प्रमुख अब्बास खान भी
उन्हीं में से एक हैं। वे पाकिस्तान से एक स्टूडेंट के रूप में 2001 में जापान गए और अब वहीं बसकर इस्लाम को पूरे जापान में फैलाने
के मिशन में लगे हैं। देश में मुस्लिमों की
बढ़ती तादाद से जापानियों में बेचैनी बढ़ रही है। वे उनकी मस्जिदों और देश में
हिजाब-बुर्का कल्चर बढ़ने का विरोध कर रहे हैं। जापानियों का कहना है कि विदेशियों
को देश में बसने और काम करने की मंजूरी दी जानी चाहिए,लेकिन बाहर से आने वाले लोगों को भी स्थानीय संस्कृति का सम्मान
करना चाहिए। वे मुस्लिमों को मदरसे और कब्रिस्तानों के लिए जमीन की मंजूरी दिए
जाने का भी लगातार विरोध कर रहे हैं।




