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- महिला के टॉप या पैंट {निर्वस्त्र किए बिना} के ऊपर छूना यौन उत्पीड़न नहीं...बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से छिड़ी नई बहस....
महिला के टॉप या पैंट {निर्वस्त्र किए बिना} के ऊपर छूना यौन उत्पीड़न नहीं...बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से छिड़ी नई बहस....
उत्पीड़न करने के लिए 39 वर्षीय व्यक्ति को तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष और नाबालिग पीड़िता की अदालत में गवाही के मुताबिक, दिसंबर 2016 में आरोपी सतीश नागपुर में लड़की को खाने का कोई सामान देने के बहाने अपने घर ले गया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह दर्ज किया कि अपने घर ले जाने पर सतीश ने उसके वक्ष को पकड़ा और उसे निर्वस्त्र करने की कोशिश की। हाईकोर्ट ने कहा, चूंकि आरोपी ने लड़की को निर्वस्त्र किए बिना उसके सीने को छूने की कोशिश की, इसलिए इस अपराध को यौन हमला नहीं कहा जा सकता है और यह भादंसं की
धारा 354 के तहत महिला के शील को भंग करने का अपराध है। धारा 354 के तहत जहां न्यूनतम सजा एक वर्ष की कैद है, वहीं पोक्सो कानून के तहत यौन हमले की न्यूनतम सजा तीन वर्ष कारावास है। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले पर समाज के बड़े वर्ग में नाराजगी है। एक ओर जहां महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि इस मामले में संस्था सुप्रीम कोर्ट जाएगी तो वहीं कार्यकर्ताओं और बाल अधिकार निकायों ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट






