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- किसान आंदोलन बैक फुट पर क्यू सरकार ....?
Posted by : achhiduniya
22 January 2021
संसद का
बजट सत्र 29 जनवरी से शुरू होने वाला है। विपक्ष की पूरी तैयारी है कि सरकार को
कृषि कानूनों और दिल्ली की सीमाओं पर जारी प्रदर्शन को लेकर घेर लिया जाए। राष्ट्रीय
दलों से लेकर क्षेत्रीय क्षत्रपों ने खुलकर किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया है, ऐसे में बीजेपी संसद में अलग-थलग पड़ सकती है। भले ही आंकड़े
मोदी सरकार के पक्ष में हो, लेकिन बीजेपी नहीं चाहेगी कि
छोटे-छोटे दल भी एकजुट होकर कोई समूह बना लें। किसान आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक
संघ
भी बीच-बीच में राय रखता रहा। खबरें आईं कि जिस
तरह सरकार किसान आंदोलन को हैंडल कर रही है, उससे RSS खुश नहीं। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में संघ के
सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा था कि 'एक मिडल
ग्राउंड खोजने की जरूरत है और दोनों पक्षों को हल निकालने की दिशा में काम करना
चाहिए।' जोशी का कहना था कि किसी भी प्रदर्शन का लंबे वक्त तक चलना
समाज के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। यह एक तरह से बीजेपी की अगुवाई वाली
एनडीए सरकार को संदेश था कि संघ इन सबसे खुश नहीं है। पार्टी के कई नेता यह कह
चुके हैं कि सरकार को इन कानूनों पर और चर्चा करनी चाहिए थी या आपत्तियां उठने पर
इन्हें सिलेक्ट कमिटी को रेफर कर देना चाहिए था। अगर ऐसा करते तो विपक्ष कमजोर
पड़ जाता और आंदोलन इतना मजबूत नहीं होता। संघ के इस मामले पर खुलकर बोलने से, पार्टी में सरकार के रवैये से नाखुश नेताओं को भी बोलने का मौका
मिल सकता है। सरकार नहीं चाहती कि गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में किसान
ट्रैक्टर रैली निकालें। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से रैली रुकवाने की गुहार
लगाई थी मगर SC
ने कहा कि इस पर फैसला उसी (पुलिस) को करना है।
अगर ट्रैक्टर परेड निकलती है तो यह सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी की बात होगी। ऐसा
हुआ तो किसानों की रैली गणतंत्र दिवस परेड को ओवरशैडो कर जाएगी। केंद्र सरकार ऐसा
कभी नहीं चाहेगी। 12 जनवरी को अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नए
कानूनों को लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी। ऐसा कम ही होता है जब संसद से पास
कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगाए। सरकार को इसकी उम्मीद नहीं थी। जब SC ने एक एक्सपर्ट कमिटी बनाई तो सरकार को लगा कि यह इन
विरोध-प्रदर्शनों को खत्म करने का एक रास्ता हो सकता है। हालांकि कई नेताओं ने
से इसे 'न्यायिक सीमा का अतिक्रमण' करार दिया
है।



