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- पुलिस फायरिंग में 24 किसानों की हुई थी मौत,जाने क्या है मुलताई कांड...? बीजेपी का कांग्रेस पर वार..
Posted by : achhiduniya
03 February 2021
किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मुलताई कांड की याद दिलाई है। संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा है कि ये सरकार किसानों को मारना चाहती है,लेकिन ये सरकार किसी को नहीं मारना चाहती है। किसान, मजदूर, मजलूम और महिलाओं के लिए काम करती है। मारना क्या होता है ये 1998 में मध्यप्रदेश में हुआ था। उस वक्त एमपी में कांग्रेस की सरकार थी। किसानों अंधाधूध गोली चली थी। संबित पात्रा ने कहा कि 28 किसान वहां जालियांवाला बाग की तरह भून दिए
गए थे। राहुल गांधी इसे मारना और रौंदना कहते हैं। गौरतलब है की एमपी के बैतूल जिले स्थित मुलताई में आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस ने फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में 24 किसानों की मौत हुई थी। घटना 12 जनवरी 1998 की है। उस समय मध्यप्रदेश कांग्रेस का राज था और मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में मुलतई गोलीकांड भी किसान आंदोलन को लेकर ही हुआ था। 12 जनवरी 1998 को मुलताई स्थित तहसील कार्यालय को किसानों
ने दोपहर 1 बजे घेर लिया था। मुआवजे की मांग को लेकर किसान तहसील कार्यालय पर पथराव कर रहे थे। उसके बाद पुलिस ने किसानों आंसू गैस और लाठीचार्ज शुरू कर दिया। कहा जाता है कि बेकाबू किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बिना किसी सूचना के फायरिंग शुरू कर दी। इसमें 17 किसानों की मौत हुई थी,लेकिन स्थानीय लोगों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा है कि 24 किसानों की मौत हुई थी, जिसमें एक स्कूली बच्चा भी शामिल था। दरअसल, मुलताई इलाके में सोयाबीन की खेती खूब होती है। गेरुआ बीमारी की वजह से पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। इसके साथ ही रही सही कसर बेमौसम
बरसात ने पूरी कर दी थी,लेकिन किसानों की बात कोई सुनने वाला नहीं था। इस बीच जनता दल के प्रशिक्षण शिविर लेने डॉ सुनीलम उस एरिया में पहुंचे थे। इस बीच किसान उनसे मिलने पहुंच गए और अपनी बात उनके सामने रखी। उन्होंने देखा कि सोयाबीन की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। उसके बाद मुलताई के किसानों के साथ उन्होंने 25 दिसंबर 1997 को मुलताई तहसील के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान उन्होंने
आसपास के 400 गांवों का दौरा भी किया। इसके साथ ही एक किसान संघर्ष समिति भी बनाई गई। इसी के बैनर तले इलाके में महापंचायत बुलाई गई। किसान नेताओं ने इसके बाद एक मांग पत्र बनाई। 9 जनवरी 1998 को इस महापंचायत के बाद बैतूल पुलिस ग्राउंड में हजारों की संख्या में किसान जमा हो गए। किसान प्रति एकड़ 5000 रुपये की मुआवजा मांगने लगे,लेकिन तत्कालीन कलेक्टर इतनी राशि देने को तैयार नहीं थे। साथ ही किसान आधी कीमत पर राशन की मांग कर रहे थे। किसानों ने चेतावनी दी थी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो 2 दिन के अंदर मुलताई किसान कार्यालय पर ताला जड़ देंगे। किसान अपनी मांग पर अड़ी रहे,लेकिन सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी। 12 जनवरी से पहले किसानों मुलताई में कुछ गाड़ियों को फूंक दिया था। फिर 12 जनवरी को मुलताई तहसील कार्यालय को घेर लिया। किसानों को हटाने के लिए पुलिस ने जबरदस्ती फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें 24 किसानों की मौत हुई है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेताओं की वजह से ही ये सब हुआ था।{साभार}





