- Back to Home »
- National News »
- राजा डरता है तो किले बंदी करता है,सरकार की हिम्मत नहीं जो कीलों से हमें रोक सके,किसान नेता राकेश टिकैत ने हुंकार भर सरकार को दी चुनौती....
राजा डरता है तो किले बंदी करता है,सरकार की हिम्मत नहीं जो कीलों से हमें रोक सके,किसान नेता राकेश टिकैत ने हुंकार भर सरकार को दी चुनौती....
Posted by : achhiduniya
03 February 2021
हरियाणा के जींद में
बुधवार को किसान महापंचायत का
आयोजन किया गया। महापंचायत में करीब 30 हजार
किसान पहुंचे। किसानों के कार्यक्रम में पहुंचे राकेश टिकैत ने कहा, मैं भी किसान हूं। इस आंदोलन के नेता गांव के लोग हैं। हमारे इस आंदोलन के नेता किसान ही हैं। हमारा
ऑफिस अब वहीं होगा। आंदोलन में काम करने
वाले आदमी भी वही होंगे। हम सभी तो पंचायती राज को मानने वाले लोग हैं। हम वहीं
डटे रहेंगे और वहीं से सारा काम काज देखेंगे। अब अक्टूबर की तैयारी करनी है। हम अब तिजोरी में
अनाज बंद नहीं होने देंगे। ये अब जमीन को
बचाने की लड़ाई है। राकेश टिकैत ने कहा, हम खाप पंचायतों को मानने वाले हैं। न आफिस बदलेंगे, न मंच बदलेंगे। उन्होंने
आगे कहा, राजा डरता है तो किले बंदी करता है। सरकार की हिम्मत नहीं जो
कीलों से हमें रोक सके। युद्ध में घोड़े नहीं बदलते। राकेश टिकैत ने किसानों से
कहा,आपको दिल्ली जाने की जरुरत नहीं, अपना
गुस्सा हमें दे दें। जींद की महापंचायत से राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को चुनौती
देते हुए ये भी कहा है कि हमने अभी सरकार से बिल वापस की बात कही है, अगर गद्दी वापसी की बात कर दी तो सरकार का क्या होगा। महापंचायत
में खापों ने पांच प्रस्ताव पारित किए। उन प्रस्तावों कहा गया है कि तीन केंद्रीय
कृषि कानून रद्द किए जाएं, एमएसपी पर कानूनी जामा पहनाया जाए। स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू किया
जाए, किसानों का कर्जा माफ किया जाए तथा 26 जनवरी को पकड़े गए किसानों को और उनके जब्त किए गए ट्रैक्टरों, वाहनों को छोड़ा जाए तथा सभी दर्ज मामले वापस किए जाएं। इन
पांचों प्रस्तावों को कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने पढ़ कर सुनाया और
उपस्थित भीड़ को हाथ उठा कर समर्थन किया। कंडेला ने बताया कि इस महापंचायत में 100 से अधिक खापें, तपे, बारह के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।



