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- कोई जब चाहे जहां चाहे प्रदर्शन नहीं कर सकता...सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी
Posted by : achhiduniya
13 February 2021
सर्वोच्च अदालत ने पिछले वर्ष अपने फैसले में कहा
था कि शाहीन बाग में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान
सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा जमाना स्वीकार्य नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि
कुछ अचानक प्रदर्शन हो सकते हैं लेकिन लंबे समय तक असहमति या प्रदर्शन के लिए
सार्वजनिक स्थानों पर लगातार कब्जा नहीं किया जा सकता है जिससे दूसरे लोगों के अधिकार प्रभावित हों। जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिसअनिरूद्ध
बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा,हमने समीक्षा
याचिका और सिविल अपील पर गौर किया है और आश्वस्त हैं कि जिस आदेश की समीक्षा करने
की मांग की गई है उसमें पुनर्विचार किए जाने की जरूरत नहीं है। पीठ ने हाल में
फैसला पारित करते हुए कहा कि इसने पहले के न्यायिक फैसलों पर विचार किया और गौर
किया कि प्रदर्शन करने और असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है,लेकिन उसमें कुछ कर्तव्य भी हैं। याचिका में पिछले वर्ष सात
अक्टूबर के फैसले की समीक्षा करने की मांग की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने मामले की
सुनवाई न्यायाधीश के चैंबर में की और मामले की खुली अदालत में सुनवाई करने का
आग्रह भी ठुकरा दिया। उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष सात अक्टूबर को फैसला दिया था
कि सार्वजनिक स्थलों पर अनिश्चित काल तक कब्जा जमाए नहीं रखा जा सकता है और असहमति
के लिए प्रदर्शन निर्धारित स्थलों पर किया



