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आप सुबह से शाम तक कितनी स्वदेशी और कितनी विदेशी चीजों का इस्तेमाल करते हैं...पीएम मोदी का जनता से सवाल
Posted by : achhiduniya
11 February 2021
भारतीय जनता पार्टी के विचारक दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर
पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पंडित
दीनदयाल उपाध्याय के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था।
वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे और भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने
देश को एकात्म मानववाद जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी और कहा कि दुनिया को पूंजीवाद
या साम्यवाद नहीं, बल्कि मानववाद की जरूरत है। दीनदयाल उपाध्याय का
ये भी कहना था कि हिंदू कोई धर्म या संप्रदाय नहीं, बल्कि
भारत की राष्ट्रीय संस्कृति है। वो राजनेता होने के साथ-साथ एक पत्रकार और लेखक भी
थे। उन्होंने RSS द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका पान्चजन्य की नींव रखी थी। इस पत्रिका के पहले संपादक देश के पूर्व प्रधानमंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी थे। पीएम मोदी ने कहा कि सामाजिक जीवन में एक नेता को कैसा होना
चाहिए, भारत के लोकतन्त्र और मूल्यों को कैसे जीना चाहिए, दीनदयाल जी इसके भी बहुत बड़ा उदाहरण हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि
आप एक लिस्ट बनाइए कि सुबह उठने से लेकर सोने तक कितनी स्वदेशी और कितनी विदेशी
चीजों का इस्तेमाल करते हैं। अपने संबोधन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने बीजेपी
कार्यकर्ताओं और देशवासियों से अपील करते हुए कहा, आप अपने
परिवार के साथ बैठें और लिस्ट बनाएं कि आप दिन भर में कितनी स्वदेशी और विदेशी
चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इसके
साथ ही पीएम मोदी ने बीजेपी सांसदों से कहा, आप खुद
भी स्वदेशी अपनाएं और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। पीएम ने कहा, हमारे
शास्त्रों में कहा गया है- “स्वदेशो भुवनम् त्रयम्” अर्थात, अपना देश ही हमारे लिए सब कुछ है, तीनों
लोकों के बराबर है। जब हमारा देश समर्थ होगा, तभी तो
हम दुनिया की सेवा कर पाएंगे। एकात्म मानव दर्शन को सार्थक कर पाएंगे। उन्होंने
आगे कहा,दीनदयाल उपाध्याय जी भी यही कहते थे। उन्होंने लिखा था-एक सबल राष्ट्र ही विश्व को
योगदान दे सकता है। यही संकल्प आज आत्मनिर्भर
भारत की मूल अवधारणा है। इसी आदर्श को लेकर ही देश आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे
बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा,लोकल इकॉनमी पर विजन इस बात का
प्रमाण है कि उस दौर में भी उनकी सोच कितनी प्रैक्टिकल और व्यापक थी। आज वोकल फॉर
लोकल
के मंत्र से देश इसी विजन को साकार कर रहा है। आज
आत्मनिर्भर भारत अभियान देश के गांव-गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के भविष्य निर्माण का माध्यम बन रहा है।




