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चुनावी बॉन्ड की और बिक्री होने से राजनीतिक दलों का अवैध और गैरकानूनी वित्तपोषण और अधिक बढ़ेगा...रोक पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
Posted by : achhiduniya
18 March 2021
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर केंद्र और अन्य पक्षों को
यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि चुनावी बॉन्ड की आगे और बिक्री की
अनुमति नहीं दी जाए। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों की फंडिंग और उनके
खातों में पारदर्शिता की कथित कमी से संबंधित एक मामले का निपटारा होने के बाद ही
बॉन्ड की बिक्री की अनुमति हो। लंबित याचिका में एनजीओ की ओर से दाखिल आवेदन में
दावा किया गया है कि इस बात की गंभीर आशंका है कि पश्चिम बंगाल और असम समेत कुछ
राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी बॉन्डों की आगे और बिक्री से
मुखौटा कंपनियों के जरिए राजनीतिक दलों का अवैध और गैरकानूनी वित्तपोषण और बढ़ेगा।
पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में चुनाव के दौरान चुनावी बॉन्ड पर रोक लगाने
वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार है। कोर्ट 24 मार्च को इस पर सुनवाई
करेगा। वकील प्रशांत भूषण ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी, क्योंकि ये बॉन्ड 1 अप्रैल से जारी होने वाले हैं। CJI एसए बोबडे ने कहा कि वे अगले बुधवार को इस पर सुनवाई करेंगे। आरोप है की राजनीतिक
दलों द्वारा 2017-18 और 2018-19 के लिए उनकी ऑडिट रिपोर्ट में घोषित चुनावी
बॉन्डों के आंकड़ों के अनुसार सत्तारूढ़ दल को आज तक जारी कुल चुनावी बॉन्ड के 60
प्रतिशत से अधिक बॉन्ड प्राप्त हुए थे। आवेदन में केंद्र को मामला लंबित रहने तक
और चुनावी बॉन्ड की बिक्री नहीं होने देने का निर्देश देने की मांग करते हुए दावा
किया गया है कि अब तक 6,500 करोड़ रुपये से अधिक के
चुनावी बॉन्ड बेचे गए हैं, जिनमें अधिकतर चंदा सत्तारूढ़
पार्टी को गया है। आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों द्वारा 2017-18 और 2018-19 के लिए
उनकी ऑडिट रिपोर्ट में घोषित चुनावी बॉन्डों के आंकड़ों के अनुसार सत्तारूढ़ दल को
आज तक जारी कुल चुनावी बॉन्ड के 60 प्रतिशत से अधिक बॉन्ड प्राप्त हुए थे। आवेदन में
केंद्र को मामला लंबित रहने तक और चुनावी बॉन्ड की बिक्री नहीं होने देने का
निर्देश देने की मांग करते हुए दावा किया गया है कि अब तक 6,500 करोड़ रुपये से अधिक के चुनावी बॉन्ड बेचे गए हैं, जिनमें अधिकतर चंदा सत्तारूढ़ पार्टी को गया है। वकील प्रशांत
भूषण के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया,इस बात
की गंभीर आशंका है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम में होने वाले चुनावों से पहले चुनावी बॉन्ड की और
बिक्री होने से मुखौटा कंपनियों के जरिये राजनीतिक दलों का अवैध और गैरकानूनी
वित्तपोषण और अधिक बढ़ेगा।




