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- पीएम-केयर फंड में सैकड़ों करोड़ रुपये जमा फिर भी.....कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
Posted by : achhiduniya
17 April 2021
कांग्रेस कार्य समिति ने आरोप लगाया कि पहले दिन से ही केंद्र
सरकार ने महामारी के नियंत्रण से संबंधित सभी शक्तियां और अधिकार अपने हाथों में
ले लिए। उसने कहा, महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के
अंतर्गत केंद्र सरकार का हर आदेश तथा निर्देश कानून बन गया और राज्य सरकारों के
पास प्रशासनिक उपायों को अपनाने तथा लागू करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं रही। अपारदर्शी
पीएम-केयर फंड में सैकड़ों करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद राज्य सरकारों को
पर्याप्त धन मुहैया कराने में केंद्र विफल रहा जबकि राज्य दो मोर्चों पर युद्ध लड़
रहे थे। एक महामारी के खिलाफ और दूसरा आर्थिक मंदी के खिलाफ। सीडब्ल्यूसी ने कहा, लोगों को समझना होगा कि जब तक तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए
जाएंगे, राष्ट्र को एक अभूतपूर्व विनाश का सामना करते रहना पड़ेगा। आशा
करते हैं कि सरकार विवेक और सद्बुद्धि से काम लेगी। कांग्रेस की शीर्ष नीति
निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने शनिवार को आरोप लगाया कि
कोरोना वायरस महामारी से निपटने में केंद्र सरकार का भारी कुप्रबंधन और अक्षमता
देखने को मिली है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई सीडब्ल्यूसी की
बैठक में यह फैसला भी किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पार्टी के
सुझावों को लेकर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजेंगे। कांग्रेस की शीर्ष इकाई ने कहा, संक्रमण से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक उपाय सतही थे। जब कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं था, ऐसी पस्थितियों में रोकथाम ही मात्र विकल्प था। उसके लिए टेस्टिंग, ट्रैकिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट की आवश्यकता थी,लेकिन इस दिशा में भी केंद्र सरकार का प्रयास अपर्याप्त रहा। उसने आरोप लगाया, केन्द्र सरकार इस संबंध में पर्याप्त जन जागरूकता पैदा करने में असफल रही कि महामारी का घटता हुआ प्रकोप
महामारी की दूसरी लहर का सूचक हो सकता है, जो कि पहली लहर की तुलना में अधिक विनाशकारी हो सकता है। बयान में दावा किया गया, पर्याप्त धन और अन्य रियायतें प्रदान करके भारत में दो स्वीकृत टीकों के उत्पादन और आपूर्ति में तेजी से वृद्धि करने में विफलता रही। भारत में अन्य टीका बनाने वाली कंपनियों के स्वीकृत टीकों के अनिवार्य लाइसेंसिंग और उत्पादन का विकल्प अपनाने में विफलता रही। सीडब्ल्यूसी ने कहा, पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के टीकाकरण के बाद सार्वभौमिक टीकाकरण लागू करने में विफलता रही। टीकाकरण कार्यक्रम में पूर्व पंजीकरण और नौकरशाही नियंत्रण से छुटकारा दिलाने में विफलता रही। टीकाकरण का क्रियान्वयन राज्य सरकारों और सरकारी तथा निजी अस्पतालों को सौंपने में विफलता रही। उसने दावा किया, टीके की खुराक की बर्बादी को रोकने या कम करने में विफलता रही, जिस कारण आज 23 लाख से भी अधिक खुराक बर्बाद हो चुकी है। संक्रमित व्यक्तियों और उनके संपर्कों की टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग के परिमाण और गति को बनाए रखने में विफलता देखने को मिली। उसने यह आरोप भी लगाया, आत्मनिर्भरता के अव्यावहारिक जोश के कारण अन्य ऐसे टीकों के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने में विफलता रही, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ और जापान में मंजूरी मिल गई थी। सीडब्ल्यूसी ने दावा किया कि राज्यों को पर्याप्त मात्रा में टीके उपलब्ध नहीं कराये गए।




