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- किन्नरों के ताली की आवाज क्यू होती है औरों से जुदा,होते है उनके अपने रीति रिवाज...
Posted by : achhiduniya
14 April 2021
किन्नर समुदाय के बारे में काफी सारी बातें हैं, जो दूसरों से अलग हैं। जैसे यहां किसी नए किन्नर को समाज
में शामिल करने के लिए काफी रीति-रिवाज होते हैं। नए किन्नर की शारीरिक और मानसिक
अवस्था जांचकर पक्का किया जाता है कि वो किन्नर समुदाय से जुड़ने के लिए पूरी तरह
से तैयार है। उसके बाद शामिल होने पर बाकायदा भोज और नाच-गाना भी होता है। ज्यादातर
किन्नर उत्सवों
में जाकर और दुआएं देकर कमाई करते हैं। हालांकि अब समाज की मुख्यधारा में स्वीकार्यता बढ़ी है और वे नौकरी भी करने लगे हैं,लेकिन ऐसे लोग बहुत कम हैं। किन्नर मिल-जुलकर परिवार की तरह रहते हैं और अपने सबसे अनुभवी किन्नर को गुरु मानते हैं। यही गुरु परिवार की व्यवस्था बनाए रखता है। पैसों का लेनदेन और खर्च जैसे काम भी इसी गुरु के कहने पर होते हैं। आमतौर पर हम लोग किन्नरों को जिस चीज से सबसे पहले पहचानते हैं,वो होती है उनकी खास तरीके से बजाई जाने वाली ताली और उनके हावभाव। उनकी ताली जैसी बजती है और बजाई जाती है,वो आम
लोग नहीं कर पाते। कैसी बजती है ऐसी ताली और इस ताली से वो कैसे अपनी भावनाओं को भी जाहिर करते हैं। किन्नरों के ताली बजाने का अपना तरीका होता है। आम ताली में दोनों हाथ वर्टिकल या हॉरिजॉन्टल होते हैं और उंगलियां आपस में लगभग जुड़ी होती हैं। वहीं किन्नर जब ताली बजाते हैं तो एक हाथ वर्टिकल और एक हॉरिजॉन्टल तरीके से आपस में जुड़ता है और उंगलियां एकदम दूर-दूर होती हैं। इस ताली से खास तरह की आवाज निकलती है जो काफी ऊंची होती है।


