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- मरीज को किस तरह व कितनी ऑक्सिजन देनी चाहिए....?
Posted by : achhiduniya
22 April 2021
डॉ. स्मित वढेर के अनुसार कोरोना संक्रमित को नॉन रीब्रीडिंग
मास्क (एनआरएम) के जरिए ऑक्सिजन देंगे तो वह ज्यादा कारगर होगी। इसमें किसी भी
मरीज को हाईफ्लो ऑक्सिजन दे सकते हैं। एनआरएम में मरीज को बाहर की हवा नहीं मिलती।
इसे ट्यूबिंग के साथ ऑक्सिजन सिलिंडर से अटैच करना होता है। फिर मरीज की नाक और
मुंह को कवर कर मास्क पहना दिया जाता है। फिर पल्स ऑक्सिमीटर के जरिए ऑक्सिजन
सैचुरेशन देखना होता है। इसमें यह ध्यान देना जरूरी है कि मरीज का सैचुरेशन 95 के
ऊपर ही रहे। उदाहरण के लिए अगर 4 लीटर प्रति मिनट के फ्लो से मरीज का सैचुरेशन 88
आ रहा है, तब मरीज को अधिक ऑक्सिजन की जरूरत है। उसका फ्लो बढ़ाना होगा। 5
लीटर प्रति मिनट फ्लो पर यदि 92 से ऊपर सैचुरेशन जाता है, तब ठीक मान सकते हैं। एक से दो दिन उसी फ्लो के साथ ऑक्सिजन
दें। फिर बाद में फ्लो कम करके देखें कि मरीज का सैचुरेशन कम तो नहीं हो रहा। यदि नॉर्मल सैचुरेशन नहीं आ रहा, तो फ्लो बढ़ाना होगा। मरीज को
इसके साथ डेक्सामेथासोन/मिथाइलप्रेडिसोलोन
जैसी दवाएं भी देनी पड़ सकती हैं। इससे सांस की नलियों को खोलने में मदद मिलती है।
अगर एनआरएम नहीं मिलता, तो साधारण मास्क भी ले सकते
हैं। कुछ बड़े हॉस्पिटल्स में सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन केबिन या टैंक होता है, जहां से जिस बेड पर ऑक्सिजन की जरूरत है, वहां पाइपलाइन के जरिए इसकी सप्लाई होती है। छोटे हॉस्पिटल्स
में ऑक्सिजन बड़े-बड़े सिलिंडरों में पहुंचाई जाती है, फिर पाइपलाइन के जरिए मरीज के बेड तक पहुंचती है। बेहद छोटे
हॉस्पिटल्स,
जहां पाइपलाइन की सुविधा नहीं है, वहां ऑक्सिजन के छोटे सिलिंडर मरीज के बेड के पास लगाए जाते
हैं।



