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- अधिक एंटीबायोटिक दवाई का सेवन जान की दुश्मन न बन जाए....?
Posted by : achhiduniya
13 May 2021
अक्सर कुछ दवाइयो के साथ एंटीबायोटिक की गोलिया ली जाती है वहीं कुछ लोग प्रतिरोधी
क्षमता बढ़ाने के लिए भी डॉक्टर के परामर्श के बिना भी इसे चालू रखते है। एंटीबायोटिक का लंबे समय तक सेवन उसका बैक्टीरिया पर प्रभाव को कम कर देता है। ऐसे में एंटिबायोटिक डोज बढ़ाने के
फायदे नुकसान पर एक शोध ने प्रकाश डाला है। हाल ही में हुए इस शोध में पाया गया है
कि दवा के प्रतिरोध से निपटने के लिए एंटी बायोटिक का डोज बढ़ाया जाना कुछ बैक्टीरिया
को ही तंदुरुस्त बना सकता है। इससे पहले इस तरह के जोखिम के बारे में विचार नहीं
किया गया था। संयुक्त राष्ट्र ने सूक्ष्मजीवी के खिलाफ प्रतिरोध को वैश्विक समुदाय
के तौर पर सामान कर रहे हमारे सबसे बड़े खतरों में से एक बताया है। अनुमान लगाया
गया है कि साल 2050 तक इसकी वजह से एक करोड़ मौतें हो जाएगीं। पिछले शोध ने
दर्शाया था कि बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक डोज बढ़ाने से उसमें प्रतिरोध विकसित
करने की क्षमता धीमी कर सकता है,लेकिन इस बात पर बहुत कम ध्यान
दिया गया था कि डोज बढ़ाने से समग्र तौर पर सूक्ष्मजीवियों की संपूर्ण स्वास्थ्य
पर क्या असर होगा। ब्रिटेन और यूरोप के शोधकर्ताओं ने ई.कोली नाम के बैक्टीरिया के
जनसंख्या की तीन आम एंटीबायोटक पर प्रतिक्रिया का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि
जहां अधिक एंटीबायोटिक डोज ने बैक्टीरिया के प्रतिरोध की दर को कम किया, वहीं दूसरी ओर समग्र तौर पर बैक्टीरिया का स्वास्थ्य बेहतर हुआ
यानि उनकी प्रजनन की दर में भी वृद्धि देखी गई। शोधकर्ताओं ने दर्शाया कि कैसे
एंटीबायोटिक का ज्यादा डोज एक दुविधा पैदा कर रहा है और इसका अंतिम परिणाम और
ज्यादा जुझारू बैक्टीरिया हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि नए विकसित हो रहे
स्ट्रेंस की तंदुरुस्ती इस समस्या को एक नया आयाम दे रही है। दुनिया में
एंटीबायोटिक प्रतिरोधी सुपरबग्स के द्वारा और ज्यादा लोगों के मरने के अनुमान के
बीच लैगेटर कहते हैं कि इस मामले में और ज्यादा शोध के ज्यादा जरूरत है। हमें लंबे
समय के नतीजों पर भी ध्यान देना होगा। ये बहुत ही जटिल नतीजे हैं। लैगेटर के
सामान्य से अध्ययन ने बताया है कि अधिक डोजों से प्रतिरोध तो धीमा हो जाता है, लेकिन स्ट्रेन बेहतर हो जाते हैं। लैगेटर का कहना है कि नई
दवाओं को एक ही बात को ध्यान में रखकर विकसित किया जाता है कि वे कितना प्रभावी
रूप से संक्रमण से मुक्ति दिला सकते हैं,लेकिन
इस बात पर बहुत ही कम ध्यान दिया जाता है कि लक्षित बैक्टीरिया इन दवाओं के लिए
प्रतिरोध विकसित करने के साथ तंदुरुस्त स्ट्रेन में विकसित हो सकते हैं। पहले भी
माना जाता रहा है कि एंटीबायोटिक लंबे समय के बाद बैक्टीरिया पर बेअसर हो जाती है, लेकिन
वे उन्हें ही मजबूत बना सकती हैं यह पहली बार देखा गया है।




