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- बादलों से बर्फ के छोटे टुकड़े यानि ओले क्यों गिरते हैं-कैसे बनती है बिजली...?
Posted by : achhiduniya
19 May 2021
जब बादल तैरते हैं तो ये हल्के फुल्के नहीं होते बल्कि अपने साथ खासा वजन
लेकर चलते हैं। बादल पानी या बर्फ़ के हज़ारों नन्हें नन्हें कणों से मिलकर बनते
हैं। ये नन्हें कण इतने हल्के होते हैं कि वे हवा में आसानी से उड़ने लगते हैं। उस
दौरान हवाएं एक खास दिशा में चलती हैं, जिसे
हम मानसूनी हवाएं भी कहते हैं। वो बड़े पैमाने पर समुद्र के ऊपर बनने वाले बादलों
को लगातार बहाकर लाती हैं।
भारत के संदर्भ में देखें तो हर साल मॉनसून के समय नमी लिए बादल हवाओं के चलते उत्तर की ओर बढ़ते हैं। जहां कहीं वो ज्यादा भारी हो जाते हैं, वहां बारिश कर देते हैं यानि वो रास्ते में मिलने वाली बूंदों को खुद से जोड़कर और बड़े होते जाते हैं,ज्यादा पानी की बूंदों को समाहित भी करते जाते हैं। कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े गिरने लगते हैं, जिन्हें हम ओले यानि हेल स्टोर्म कहते हैं। बर्फ पानी की ही एक अवस्था है। ये पानी के जमने से बनती है। बादलों में कई बार
तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है। तब बादलों से जुड़ी हुई नमी पानी की छोटी छोटी बूंदों के रूप में बर्फ के गोल टुकड़ों में बदल जाती है। जब इन टुकड़ों का वजन ज्यादा हो जाता है तो ये नीचे गिरने लगते हैं। जब ये बर्फ के टुकड़े नीचे गिरते हैं तो वायुमंडल में मौजूद गरम हवा से टकराकर पिघलने लगते हैं। आमतौर पर ये पानी में बदल जाते हैं,लेकिन बर्फ के अधिक मोटे और भारी टुकड़े जो पूरी तरह पिघल नहीं पाते, वे बर्फ के छोटे-छोटे गोल-गोल टुकड़ों के रूप में धरती पर गिरते हैं। ये तो आपने जान ही लिया कि बादलों में बहुत
बारिक कणों के रूप में नमी होती है। जब हवा और जलकणों के बीच घर्षण होता है तो इससे बिजली पैदा होती है। जलकण चार्ज हो जाते हैं। कुछ कण धनात्मक तो कुछ ऋणात्मक चार्ज होते हैं। जब प्लस और माइनस चार्ज के कण समूह करीब आथे हैं तो उनके टकराने से बिजली उत्पन्न होती है। ये आवाज भी करते हैं और तेज चमक भी प्रकाश की गति अधिक होने से बिजली की चमक पहले दिखाई देती है। आवाज की गति प्रकाश की गति से कम होने के कारण बादलों की गरज देर से पहुंचती है।



