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तीसरी लहर का कोई दस्तावेज या महामारी विज्ञान के सबूत नहीं घबराने या चिंतित होने की जरूरत नहीं,सतर्कता जरूरी…जाने विशेषज्ञो की राय
Posted by : achhiduniya
17 May 2021
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन शिंदे ने बताया कि 0 से 10 साल की उम्र के
बच्चे प्राकृतिक रूप से सुरक्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि 10 साल से कम उम्र के
बच्चों में वायरल रिसेप्टर्स बहुत कम होते हैं। संक्रमित होने पर भी उनका वायरल
लोड शून्य होता है और वे तेजी से ठीक हो जाते हैं। उनके लिए गंभीर होना दुर्लभ है।
इसके बाद 11 से 18 साल की उम्र के किशोर आते हैं, और हम अपनी क्षमता
की दुरुस्त करके उसे मैनेज कर सकते हैं। शिंदे ने कहा कि इस संभावित उछाल से पूरी तरह से बचने का अंतिम उपाय है 12 से 18 वर्ष के बच्चों का युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन होना। एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. आनंद थट्टे ने कहा कि प्रशासन ने डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और पीडियाट्रिक बेड बढ़ाने का अच्छा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दूसरी लहर अब घट रही है और एक महीने में नीचे आ जाएगी। उसके बाद भी हमें सतर्कता बरतनी चाहिए। नहीं तो वायरस एक बार फिर आबादी पर हमला कर देगा। यदि
तब तक टीकाकरण में तेजी आती है, तो केवल 18 से कम उम्र के बच्चे ही अतिसंवेदनशील होगें। बाल रोग वैक्सीन के विशेषज्ञ डॉ. संजय मराठे ने कहा कि इसका कोई दस्तावेज या महामारी विज्ञान के सबूत नहीं हैं कि संभावित तीसरी लहर में बच्चे बड़ी संख्या में प्रभावित होंगे। सब कुछ आंकड़ों पर आधारित है। डॉ. संजय मराठे ने कहा कि सरकार ने अनुमान के आधार पर तैयारी शुरू कर दी है जो अच्छी बात है। हमें भविष्य में बच्चों के लिए अस्पताल और ज्यादा बेडों और आसीयू की
जरूरत है,लेकिन इससे माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है। अन्य देशों में अनुभव के बारे में पूछे जाने पर डॉ मराठे ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में उनकी दूसरी लहर में संक्रमित बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है,लेकिन हम भारत में यूएसए पैरामीटर लागू नहीं कर सकते। हमारी परिस्थितियां अलग हैं। इसके अलावा, अडल्टस के लिए एक टीका अब उपलब्ध है। इसलिए आबादी का काफी प्रतिशत सुरक्षित है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ संजय देशमुख ने भविष्यवाणी के पीछे का
गणित समझाया। उन्होंने कहा कि पहली लहर में कुल रोगियों में से 2 फीसदी से कम बच्चे थे। दूसरे में यह प्रतिशत बढ़कर 11 फीसदी हो गया। इस प्रवृत्ति के बाद, संभावित तीसरी लहर में लगभग 28-30 फीसदी मरीज बच्चे होंगे। उन्होंने कहा कि गणितीय अनुमान जरूरी नहीं कि जमीनी स्तर पर काम करें। डॉ. संजय ने कहा कि कई क्लीनिकल फैक्टर्स हैं कि बच्चों में प्राकृतिक प्रतिरक्षा होती है। भारतीय टीकाकरण कार्यक्रम और उसी आधार पर उनका वैक्सीनेशन होता है। चूंकि बच्चों के इलाज के लिए विशेष प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है, इसलिए हमने इसके लिए अपने स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। तैयारियों में कुछ भी गलत नहीं है।




