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- कार एक्सीडेंट में कैसे खुलता है एयरबैग-कौनसी गैस होती है बैग के अंदर...?
Posted by : achhiduniya
31 May 2021
फोर व्हीलर एसयूवी कार में ड्राइवर और बाकी पैसेंजर की लाइफ
सेफ्टी के लिए सीट बेल्ट और एयरबैग होते हैं जो सीधी टक्कर और खतरनाक जानलेवा
एक्सीडेंट की सूरत में गाड़ी में बैठे लोगों को मरने या गंभीर रूप से घायल और
विकलांग होने से बचाते हैं। एयरबैग एक तय स्पीड से ऊपर के टक्कर या एक्सीडेंट में
टक्कर से 60-80 मिलिसेकेंड में खुल जाता है। एक सेकेंड में 1000 मिलिसेकेंड होते हैं तो आप समझ सकते हैं कि ये सब कितना तेजी से होता है। टक्कर के 15 से 30 मिलिसेकेंड के अंदर एयरबैग
के खुलने की प्रक्रिया ऑटोमैटिक रूप से शुरू हो जाती है जो 60 से 80 मिलिसेकेंड
में पूरी हो जाती है। इतनी तेजी से एयरबैग का सर्किट एक्टिव होता है और गैस के तेज
गुबार के साथ एयरबैग का गुब्बारा खुलता है जिसमें काफी तेज दवाब का “अनाहिकर गैस” होता है। ड्राइवर या पैसेंजर
का सिर जब एयरबैग से टकराता है तो उसके साथ ही बैग का गैस कम होने लगता है और ये
काम भी मिलिसेकेंड में होता है ताकि ड्राइवर या पैसेंजर का सिर एयरबैग से टकराकर
वापस ना फिंके और उसे सिर या गर्दन में चोट आए। एयरबैग खुलने का फैसला तकनीकी तौर
पर कार की अचानक घटी स्पीड से ऑटोमैटिक सिस्टम करता है। ये न्यूटन के गति के पहले
नियम यानी जड़त्व के नियम से संचालित होता है जो कहता है कि कोई स्थिर या चल रही
चीज तब तक उसी तरह रहेगी जब तक कोई बाहरी ताकत उसका व्यवहार ना बदले। तेज कार एक्सीडेंट में
रुक भी जाए तो उस पर सवार आदमी उसी रफ्तार से चलायमान होता है और उसे कार से बाहर फेंकने से बचाने के लिए सीट बेल्ट और टक्कर में चोट से बचाने के लिए एयरबैग काम करता है। जब टक्कर होती है तो अचानक कार की रफ्तार गिर जाती है जो ब्रेक लेने के दौरान धीरे-धीरे नीचे जाती है। एयरबैग खुलने का फैसला कार में लगा सेंसर और सिस्टम स्पीड के अचानक घटने की स्पीड के आधार पर करता है कि वो ब्रेक लगाने से धीरे-धीरे नीचे जा रही है या कार टकरा चुकी है और अचानक स्पीड कम हो गई है इसलिए एयरबैग खोल दिया जाए।



