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- गन्ना किसानों के लिए अब तक के उच्चतम उचित और लाभकारी मूल्य 290 रुपये प्रति क्विंटल को स्वीकृति दी
Posted by : achhiduniya
25 August 2021
नई दिल्ली:- गन्ना किसानों के हित को ध्यान
में रखते हुए,
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की
अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने चीनी सीजन 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य
(एफआरपी) 290 रुपये प्रति क्विंटल को स्वीकृति दे दी है। स्वीकृति के
मुताबिक यह प्रत्येक 0.1% की वसूली में 10% से अधिक की वृद्धि हेतु, और
एफआरपी में रिकवरी हेतु प्रत्येक 0.1% की कमी
के लिए 2.90 रुपए प्रति क्विंटल का एक प्रीमियम प्रदान करते हुए 10% की मूल वसूली दर के लिए 290/- रुपये
प्रति क्विंटल होगी। हालांकि, सरकार ने किसानों के हितों की
रक्षा के लिए यह भी निर्णय लिया है कि उन चीनी मिलों के मामले में कोई कटौती नहीं
होगी जहां वसूली 9.5 फीसदी से कम है। ऐसे किसानों को गन्ने के लिए
वर्तमान चीनी सीजन 2020-21 में 270.75 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर आगामी चीनी सीजन 2021-22 में 275.50 रुपये
प्रति क्विंटल मिलेंगे। चीनी सीजन 2021-22 के लिए
गन्ने की उत्पादन लागत 155 रुपए प्रति क्विंटल है। 10% की वसूली दर पर 290 रुपए
प्रति क्विंटल की यह एफआरपी उत्पादन लागत से 87.1% अधिक
है, यह किसानों को उनकी लागत पर 50% से अधिक का रिटर्न देने के वादे को भी सुनिश्चित करती है। वर्तमान
चीनी सीजन 2020-21 में 91,000 करोड़
रुपये मूल्य के करीब 2,976 लाख टन गन्ने की चीनी मिलों
द्वारा खरीद की गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है और न्यूनतम समर्थन
मूल्य के मामले में धान की फसल की खरीद के बाद दूसरे स्थान पर है। आगामी चीनी सीजन 2021-22 में गन्ने के उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि को ध्यान में रखते
हुए चीनी मिलों द्वारा लगभग 3,088 लाख टन गन्ना खरीदे जाने की
संभावना है। गन्ना किसानों को किए जाने वाला कुल प्रेषण लगभग 1,00,000 करोड़ रुपये होगा। सरकार अपने किसान हितैषी उपायों के माध्यम
से यह सुनिश्चित करेगी कि गन्ना किसानों को उनकी बकाया धनराशि समय पर मिले। स्वीकृत
एफआरपी चीनी मिलों द्वारा चीनी सीजन 2021-22 (1 अक्टूबर, 2021 से
प्रारंभ) में किसानों से गन्ने की खरीद के लिए लागू होगी। चीनी क्षेत्र एक
महत्वपूर्ण कृषि-आधारित क्षेत्र है जो कृषि श्रम और परिवहन सहित विभिन्न सहायक गतिविधियों में कार्यरत लोगों के अलावा लगभग 5 करोड़
गन्ना किसानों और उनके आश्रितों एवं चीनी मिलों में सीधे कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों की आजीविका से जुड़ा है।




