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- इन्कम टैक्स के इस कानून को बदलने की कैबिनेट ने दी मंजूरी...
Posted by : achhiduniya
05 August 2021
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विवादित कानून को खत्म करने
के लिए बृहस्पतिवार को लोकसभा में कर कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया। मंत्रालय ने साथ ही ये प्रस्ताव भी रखा कि अगर
लेनदेन 28 मई 2012 से पहले हुआ है तो किसी तरह
की रेट्रो टैक्स डिमांड नहीं की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के
इस कदम से भारत कम टैक्स रेट्स पर निवेश का शानदार विकल्प बनकर उभरेगा। सरकार ने
कहा कि फाइनेंशियल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पिछले कुछ साल में कई बड़े सुधार
किए गए हैं। इससे देश में निवेश का अच्छा माहौल बना है। केंद्र सरकार ने संसद में
कहा कि सुधारों की वजह से बने निवेश के शानदार माहौल के बाद भी इस कानून के कारण
की जाने वाली टैक्स डिमांड से कई निवेशक पीछे हट रहे हैं। कोरोना संकट के बाद देश
उस जगह आकर खड़ा हो गया है, जहां अर्थव्यवस्था में तेजी
से बढ़ोतरी करना समय की मांग बन चुका है। देश की आर्थिक रफ्तार को बढ़ाने में विदेशी
निवेश की अहम भूमिका रहेगी। इससे देश में रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे। ऐसे
में ये कानून अड़चन पैदा कर रहा है। ये कानून बताता है कि केंद्र 2012 के कानून के तहत भुगतान की गई राशि
बिना ब्याज के वापस लौटाने
को तैयार है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने
वोडाफोन और केयर्न एनर्जी जैसी कंपनियों के साथ केंद्र सरकार का विवाद खड़ा करने
वाले रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स एक्ट को खत्म
करने की मंजूरी दे दी है. दोनों कंपनियों ने वित्त अधिनियम 2012 के इसी विवादित
कानून के सहारे भारत के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। कैबिनेट ने इसे रद्द करने के
लिए आयकर कानून में बदलाव को
मंजूरी दे दी है। साथ ही सरकार ने संसद में इससे जुड़ा संशोधन विधेयक भी पेश कर दिया
है। बता दे इसके
कारण केयर्न और वोडाफोन जैसी फर्मों ने अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुकदमा किया।
सभी मुकदमों में भारत को हार का सामना करना पड़ा था।


