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शराब की होम डिलिवरी कम उम्र के लोगों तक न पहुंचे कैसे सत्यापित करेंगे आप...हाई कोर्ट का केजरीवाल सरकार से सवाल
Posted by : achhiduniya
27 October 2021
दिल्ली हाई कोर्ट चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति
सिंह की बेंच ने दिल्ली सरकार से पूछा कि शराब की होम डिलिवरी का ऑर्डर करने के
वाले व्यक्ति की उम्र को सत्यापित करने की क्या प्रक्रिया है। पीठ ने दिल्ली सरकार
के वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा से पूछा, आप
खरीददार की उम्र को कैसे सत्यापित करेंगे? आपको इस
सवाल का जवाब देना चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि इसका जवाब नहीं दे सकते। मेहरा ने
पीठ के समक्ष कहा था कि यह मौजूदा नियमों में केवल संशोधन है और इसे अभी प्रभाव
में आना है।
मेहरा ने कहा कि जब भी यह प्रभाव में आएगा आधार नंबर देने या आयु
प्रमाणित करने वाले अन्य दस्तावेज दिखाने का प्रावधान होगा। नयी नीति के तहत
दिल्ली में शराब पीने की वैध उम्र 21 साल
होगी। अदालत बीजेपी सांसद परवेश साहिब सिंह वर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
जिन्होंने दिल्ली सरकार की नयी आबकारी नीति को चुनौती दी है जिसमें शराब की होम
डिलिवरी का प्रावधान है। मामले में पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट को दिल्ली
सरकार से पूछा कि वह कैसे सुनिश्चित करेगी नई नीति के तहत घर पर शराब की आपूर्ति करने के दौरान कम उम्र (वैध उम्र 21 साल से कम) के लोगों
तक
शराब नहीं पहुंचेगी। वर्मा की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने इस प्रावधान
को चुनौती दी है क्योंकि उम्र की निगरानी करने की प्रक्रिया नहीं होने की वजह से
शराब की आपूर्ति कम उम्र के लोगों और सार्वजनिक स्थानों पर भी हो सकती है। याचिकाकर्ता
द्वारा शराब की होम डिलिवरी होने पर घर के बच्चों पर दुष्प्रभाव पड़ने संबंधी
चिंता जताए जाने पर दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी
ने कहा कि व्यक्ति दुकान से भी शराब खरीद कर घर लाता है ऐसे में बच्चों पर पड़ने
वाले प्रभाव में अंतर नहीं। होम डिलिवरी की व्यवस्था पिछले 20-30 साल से मौजूद है। उन्होंने कहा कि पहले
शराब की होम डिलिवरी के
लिए ई-मेल या फैक्स् के जरिये ऑर्डर देना पड़ता था लेकिन अब यह मोबाइल ऐप के जरिये
किया जाएगा। इस दौरान अदालत को सूचित किया गया कि दिल्ली सरकार द्वारा दाखिल जवाब
रिकॉर्ड पर नहीं है। इस पर अदालत ने जवाब
को रिकॉर्ड पर दर्ज करने का निर्देश देते हुए मामले को 18 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया। उस दिन अदालत में नयी आबकारी
नीति की वैधता को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।