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- भाजपा पर MCD कर्मचारियों के 1200 करोड़ रुपये गबन का आरोप लगाया आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने..
Posted by : achhiduniya
15 October 2021
आम आदमी पार्टी के
मुख्य प्रवक्ता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि प्राइवेट हो या सरकारी, हर कर्मचारी का जीपीएफ कटता है। इसमें एक हिस्सा कर्मचारी की
तनख्वाह से कटता है और दूसरा हिस्सा एंप्लॉयर को जमा कराना होता है। एक कर्मचारी
के लिए सेवानिवृत्त होते समय जीपीएफ के पैसे को लेकर बड़ी उम्मीद होती है। कर्मचारी
सोचता है कि सेवानिवृत्त होने के बाद जीपीएफ के पैसे से बच्चों की शादी करूंगा, मकान बनाऊंगा, काम-धंधे के अंदर पैसे लगाऊंगा
और जीवन के दूसरे बड़े काम करुंगा, जिन्हें
नौकरी में
रहते हुए नहीं कर पाया हूं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के पास कर्मचारियों के जीपीएफ के 1232 करोड़ रुपये में से सिर्फ 28 करोड़
उपलब्ध हैं। एमसीडी के भाजपा नेता 2014 से
कर्मचारियों का जीपीएफ जमा नहीं करवा रहे हैं। भाजपा शासित एमसीडी ने काफी
कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद भी जीपीएफ नहीं दिया है। उन्होंने कहा, दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता बताएं कि निगम
कर्मचारियों का 1200 करोड रुपये का जीपीएफ कहां गया? एमसीडी में
जिस नई पार्टी की सरकार बनेगी, वह यह पैसा कहां से लेकर आएगी। आप नेता ने कहा,उत्तरी दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष ने सवाल पूछा कि
कर्मचारियों का जीपीएफ का कितना पैसा होना चाहिए? जिसका
जवाब आया कि 1232.45 करोड़ रुपये। इसके बाद सवाल पूछा कि जो कर्मचारी सेवानिवृत्त
हो गए हैं,
उनका कितना पैसा बकाया है, क्योंकि ऐसे काफी कर्मचारी हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनको जीपीएफ नहीं दिया गया है। तब जवाब दिया कि उनकी करीब
38.24 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसके अलावा विधायक ने कहा कि 1232 करोड रुपये में से अभी
आपके पास कितना पैसा है। हैरान करने वाली बात यह है कि 1232 करोड़ की जगह, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के पास
इस समय मात्र 28 करोड रुपए उपलब्ध हैं। बाकी का 1200 करोड़ कहां गया? यह पैसा
कहीं और नहीं जा सकता है। यह पैसा कर्मचारी को देना होता है या फिर संस्थान के पास
में होता है। इसके अलावा जो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 38 करोड़ देना है, उसके
एवज में मात्र 28 करोड़ बचे हैं। सौरभ भारद्वाज ने बताया,हमने इसके बाद सवाल पूछा कि 2014 से अब तक कितना पैसा इस खाते में जमा किया गया है। हैरानी की
बात है कि 2014 से लेकर अब तक इस खाते के अंदर कोई पैसा जमा नहीं कराया गया है।
कर्मचारियों की तनख्वाह से पैसा काटा जा रहा है, लेकिन
जमा नहीं कराया जा रहा है।