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- दल बदलू हम पार्टी अध्यक्ष जीतन राम मांझी पहुंचे दिल्ली दरबार की गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात....
Posted by : achhiduniya
19 April 2023
जीतन राम मांझी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष
हैं और उनका सिंबल कड़ाही है। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार फतेहपुर से
विधायक बने। 1983 में चंद्रशेखर सिंह की
सरकार में मंत्री बने। 1985 में दोबारा विधायक बनने में कामयाब रहे और बिंदेश्वरी
दुबे की सरकार में मंत्री बने। 1990 में चुनाव हार गए तो कांग्रेस छोड़ जनता
पार्टी में शामिल हो गए। जीतन राम मांझी दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मिले।
मांझी के अलावा इस मुलाकात में पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष रजनीश कुमार समेत 4 अन्य
नेता भी मौजूद रहे। अमित शाह से मिलने के बाद मांझी ने रटा-रटाया पुराना राग अलापा
और कहा कि श्रीकृष्ण सिंह और दशरथ मांझी को भारत रत्न देने
की मांग के लिए यहां आए
थे। मांझी और शाह के बीच मुलाकात के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय
सिन्हा ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि 2023 जाते-जाते नीतीश के साथ कोई नहीं
बचेंगे। महागठबंधन में शामिल सभी को पता चल गया है कि नीतीश डूबता हुआ जहाज पर
बैठे हैं। शाह से मुलाकात के बाद मांझी ने हम के कार्यकारिणी बैठक में एक बयान भी
दिया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन और एनडीए दोनों तरफ के लोग पार्टी को विलय करने
का दबाव बना रहे हैं, लेकिन
मांझी ऐसा करने वाला
नहीं है। अमित शाह से मुलाकात के बाद मांझी के इस बयान को अहम माना जा रहा है। अमित
शाह से मुलाकात के बाद पटना में मांझी ने कहा कि मैं भी सचिन पायलट की तरह नीतीश सरकार
के खिलाफ अनशन पर बैठूंगा। मांझी ने शराबबंदी पर नीतीश कुमार से सर्वदलीय बैठक
बुलाने की मांग कर दी है। बीजेपी की रणनीति- छोटी पार्टियों को जोड़कर महागठबंधन
से लड़ा जाए। नीतीश
कुमार से गठबंधन टूटने के बाद बीजेपी 2014 के मॉडल पर आगे बढ़ रही है। 2014 में
बीजेपी लोजपा और रालोसपा के साथ मिलकर 31 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी इस बार भी
इसी
रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी अब तक चिराग पासवान, पशुपति पारस और उपेंद्र कुशवाहा को साधने में कामयाब हो चुकी है।
पार्टी की कोशिश जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी को भी साधने की है। सभी लोग पूर्व
में बीजेपी के साथ गठबंधन में रह चुके हैं। मांझी के इस रुख से महागठबंधन के नेता
परेशान हैं और सियासी गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। 2015 में नीतीश
कुमार से अलग होने के बाद मांझी ने खुद की पार्टी बनाई थी और पिछले 8 साल में तीन बार पलटी मार चुके हैं। मांझी के बेटे अभी नीतीश
सरकार में मंत्री हैं।
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