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- WHO ने जताई एंटीबायोटिक दवाइयो के अधिक सेवन पर चिंता....
Posted by : achhiduniya
04 April 2023
एक रिपोर्ट के अनुसार, देश और दुनिया में दवाओं के प्रति रेसिस्टेंस लगातार बढ़ता जा
रहा है। भारत में कम से कम 7 लाख लोग इस समस्या से परेशान हैं, जबकि दुनियाभर में वर्ष 2050 तक दस मिलियन लोग दवाओं के प्रति
रेसिस्टेंस हो सकते हैं। दवाओं से रेसिस्टेंस होने से मतलब होता कि जिन बैक्टीरिया
और फंगस को मारने के लिए दवा तैयार की जाती है। अधिक सेवन से बैक्टीरिया उन दवाओं
के अभ्यस्त हो जाते हैं। उनकी मौत नहीं हो पाती है। कोपेनहेगन, डेनमार्क में यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल
माइक्रोबायोलॉजी
एंड इंफेक्शियस डिजीज की एक ऑनलाइन मीटिंग हुई। मीटिंग में एंटीबायोटिक के यूज पर
गंभीर चिंता जताई गई। न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में संक्रामक रोग इंचार्ज डॉ.आरोन
ग्लैट ने बताया कि एंटीबायोटिक का जिस तरह से यूज हो रहा है। एंटीबायोटिक
रेजिस्टेंस आने वाले सालों मे बड़ी चिंताओं में से एक है। यदि इस पर समय रहते
नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले सालों में जानलेवा तबाही देखने को मिल सकती है।
एंटीबायोटिक दवाओं के यूज को
लेकर WHO ने भी चिंता जताई है। WHO ने
कहा है कि दुनिया के हर देश में एंटीबायोटिक दवाओं का बेशुमार यूज हो रहा है। इससे
लोगों में कम क्षमताओं वाली एंटीबायोटिक दवाओं ने असर करना ही बंद कर दिया है।
दवाओं के प्रति ये रेसिस्टेंस बिल्कुल ठीक नहीं है। इसे ही वार्निंग ही समझा जाए। न्यूर्याक
में एंटीबायोटिक बेअसर होने के लेकर एक रिपोर्ट पब्लिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 43 वर्षीय कैंसर पेशेंट एक अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट
प्रक्रिया के लिए भर्ती थे। ट्रांसप्लांट सफल हो गया। अस्पताल से
डिस्चार्ज करने की
कवायद शुरू कर दी गई,लेकिन उसी समय दांतों में
संक्रमण और फीवर हो गया। डॉक्टरों ने इसे ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दीं। मगर
इन दवाओं का पेशेट पर
कोई असर नहीं हुआ। बाद में माइक्रोबायोलॉजी लैब टेस्टिंग से जांच की गई तो ब्लड
में क्लेबसिएला नामक घातक बैक्टीरिया मिला। यह बैक्टीरिया अधिकांश दवाओं के लिए
प्रतिरोधी था। संक्रमण बढ़ने पर पेशेंट की मौत हो गई।
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