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- ऊर्जा के क्षेत्र में भारत 2047 तक आत्मनिर्भर हो सकता है….
Posted by : achhiduniya
12 May 2023
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक 500 गीगावाट रीन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य रखा था और
इसे बहुत आसानी से हासिल किया जा सकता है। सरकार की जो नीतियां हैं,उसके मुताबिक कुछ राज्य सरकारें बहुत आगे बढ़कर
कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही देश के अंदर जो उपकरण बनाने की बात है,कई उद्योग समूहों ने कहा है कि वे उसके निर्माण
में सहयोग देंगे। मुझे लगता है कि उसको हासिल किया जा सकता है। भारत चूंकि घनी
आबादी वाला देश है और हमें 6 प्रतिशत, 7 प्रतिशत
की दर से विकास दर भी हासिल करनी है,तो पूरी तरह तेल और कोयले से हासिल ऊर्जा पर रोक
भी नहीं लगाई जा सकती है,लेकिन
रीन्यूएबल एनर्जी का काम लगातार होता रहे,
इस दिशा में सरकार काम कर रही है। सरकार वैकल्पिक
ऊर्जा को इनसेंटिवाइज करे, लेकिन
ऊर्जा के बाकी स्रोतों को भी रोकेगी नहीं। ऐसा करने के पीछे कारण यही है कि भारत
में ऊर्जा-गरीबी बहुत अधिक है। भारत
आज 86 फीसदी
तेल आयात
करता है,56 फीसदी
गैस आयात
करता है।
कोयला
भी थोड़ा-बहुत
आयात होता
है। सौर
ऊर्जा के
उपकरणों का
भी आयात
होता है,यानी
आयात पर
देश की
बहुत निर्भरता
है। सरकार
की यही
कोशिश है
कि वह
निर्भरता कम
कर दी
जाए। सौर
ऊर्जा के
निर्यातक होने,पावर
इक्विपमेंट के
निर्यातक होने
का लक्ष्य
लेकर यह
सरकार चल
रही है। जैसी
गति से
काम चल
रहा है, जो
देखा जा
रहा है
तो कोई
अचरज नहीं
कि देश
यह लक्ष्य
तय कर
ले. इसके
लिए जरूरी
बस ये
है कि
काम होता
रहे, तेल
और गैस
से हम
सौर ऊर्जा
की ओर
बढ़ते रहें। यह
तभी होगा, जब
हम
अर्जुन
की तरह
नजर गड़ाए
रखें और
लक्ष्य प्राप्ति
के लिए
सारी सरकारें
चाहे वह
किसी भी
पार्टी की
हो, एक
साथ मिलकर
इस दिशा
में काम
करें। भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल कोयले और तेल पर बहुत अधिक
निर्भर है। भारत अपनी बिजली का 68 फीसदी कोयले से बनाता है। परिवहन में भी भारत अभी तक डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल वगैरह पर ही निर्भर है। वैकल्पिक ऊर्जा
खासकर सौर ऊर्जा का भाग पिछले कुछ साल में बहुत बढ़ा है, बल्कि कहा जा सकता है कि भारत में सौर ऊर्जा के
क्षेत्र में क्रांति हुई है। भारत की आबादी आज दुनिया में सबसे अधिक है। 1 अरब 40 करोड़ लोगों के देश में हम कह सकते हैं कि 30 फीसदी आबादी के पास ऊर्जा के साधन पर्याप्त
मात्रा में हैं, लेकिन अभी भी 70 फीसदी आबादी एनर्जी-पूअर है, यानी उनके पास कम संसाधन है। उनकी क्रयशक्ति कम
होने की वजह से ही वह कम ऊर्जा का उपभोग करते हैं यानी उनके पास वाहन की उपलब्धता है, लेकिन वह खरीद नहीं सकते। उनके पास ऊर्जा के
स्रोत पहुंचे हैं, लेकिन
परचेजिंग पावर नहीं होने की वजह से वह खरीद नहीं पाते हैं. भारत को इस लिहाज से
एनर्जी पोवर्टी वाला देश कह सकते हैं। 2047 तक
जिस किसी
भी पार्टी
की सरकार
आए, वह
अगर एक
रोडमैप और
माइलस्टोन बनाकर
चलेंगे तो
यह लक्ष्य
प्राप्त करना
बिल्कुल संभव
है।

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