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- शरद पवार का इस्तीफा राजनैतिक तख़्ता पलट का मास्टर स्ट्रोक तो नही...?
Posted by : achhiduniya
02 May 2023
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [NCP] की सांसद व NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी
सुप्रिया सुले ने हाल ही मे महाराष्ट्र की राजनीति में 15 दिनो के भीतर भुंचाल आने
के संकेत दिए थे। वहीं 82
वर्षीय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार ने अपनी आत्मकथा 'लोक मझे संगति- पॉलिटिकल ऑटोबायोग्राफी' के विमोचन के दौरान संन्यास की घोषणा की है। अहम घोषणा करते हुए
पवार ने कहा,यह पार्टी संगठन के विकास के लिए, पार्टी
की विचारधारा और लक्ष्यों को लोगों तक ले जाने के लिए और लोगों की सेवा करने के
लिए
,जैसा वे उचित समझे, प्रयास
करना जारी रखेंगे। भले ही मैं अध्यक्ष पद से हट रहा हूं, लेकिन मैं सार्वजनिक जीवन से सेवानिवृत्त नहीं हो रहा हूं। शरद
पवार ने अपनी किताब में लिखा है कि बीजेपी शिवसेना को खत्म करना चाहती थी वही उनकी
रणनीति थी। विपक्ष ने बीजेपी और शिवसेना के कमजोर रिश्ते और आपसी अविश्वास का
फायदा उठाया।अमित शाह और पीएम मोदी को बाद में शिवसेना के प्रति सहानुभूति
नहीं रही ये उनके बयानों से और बॉडी लैंग्वेज से समझ आता था। एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला कर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनके पार्टी के नेता उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए मना रहे हैं। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद को छोड़ने संबंधी शरद पवार के फैसले पर कहा कि उनका निर्णय शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के इस्तीफे के फैसले जैसा है। उन्होंने पवार को
महाराष्ट्र की राजनीति की आत्मा’ करार दिया। राउत ने ट्वीट किया, गंदी
राजनीति और आरोपों से थक चुके शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे ने भी शिवसेना प्रमुख
के पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसा लगता है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है। लेकिन शिवसैनिकों के प्रेम की वजह से उन्हें अपना फैसला वापस
लेना पड़ा बालासाहेब की तरह पवार साहेब भी राज्य की राजनीति
की आत्मा हैं। राज्य और राष्ट्रीय राजनीतिक हलकों ने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के
पार्टी प्रमुख के रूप में इस्तीफा देने के फैसले का स्वागत किया, तो वहीं कई लोगों ने उनके इस फैसले को लेकर आंसू बहाए और उन्हें
अपना फैसला वापस
लेने के लिए कहा। शरद पवार के समर्थकों ने इसे लेकर कई जगहों पर
धरना दिया और कहा कि उन्हें अपना फैसला वापस लेना होगा। इसके बाद अजीत पवार, राज्य पार्टी प्रमुख जयंत पाटिल और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने
पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को शांत कराने का प्रयास किया और उनसे शांत रहने का
आग्रह किया। राकांपा नेता अनिल देशमुख उस कार्यक्रम में मौजूद थे जहां पवार ने
अपने फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य और देश को पवार साहेब की
जरूरत है। उन्होंने
मराठी समाचार चैनल से कहा,सभी ने पवार साहेब से राकांपा
प्रमुख के पद पर बने रहने का अनुरोध किया और उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने की
अपील की। शरद पवार ने घोषणा की है कि वह पार्टी प्रमुख के रूप में पद छोड़ रहे
हैं। इसके साथ ही पवार ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के नाम के लिए
एक पैनल का गठन कर लिया है। शरद पवार ने शीर्ष नेताओं की एक समिति की घोषणा की
जिसमें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, के.के. शर्मा, पी.सी. चाको, अजीत पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले, छगन भुजबल, दिलीप वाल्से-पाटिल, अनिल
देशमुख, राजेश टोपे, डॉ. जितेंद्र आव्हाड, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे और जयदेव गायकवाड़
शामिल हैं।
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