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- मिल चुके 111 साल पहले डूबे टाइटैनिक जहाज का मलबा आज तक क्यू नहीं निकाला गया..?
Posted by : achhiduniya
23 June 2023
काफी
समय पहले एक फिल्म ने बहुत ही हंगामा मचाया था जिससे समुन्द्र में हुई बड़ी पानी के
जहाज पर मानवीय त्रासदी को दर्शाया था। उस फिल्म को टाइटैनिक नाम दिया गया था जो वास्तविक
घटना को दर्शाती कहानी थी फिल्म की जरूरत के हिसाब से पात्रों में कुछ परिवर्तन किया
गया था। दुनिया के सबसे बड़े वर्ल्ड फेमस जहाज रहे टाइटेनिक को डूबे 111 साल का समय हो चुका है। इसका मलबा 1985 में ढूंढ लिया गया था। ऐसे में मन में सवाल आता है कि जब जहाज का मलबा ढूंढ
लिया गया था तो आज तक इसे बाहर क्यों नहीं निकाला गया? टाइटैनिक ने अपनी पहली यात्रा ब्रिटेन के साउथैम्पटन बंदरगाह से न्यूयॉर्क
के लिए 10 अप्रैल 1912 को शुरू
की थी,इसके ठीक 4 दिन बाद यानी 14 अप्रैल को यह नॉर्थ अटलांटिक महासागर में एक हिमखंड से टकरा गया। इस जोरदार
टक्कर में जहाज के दो टुकड़े हो गए और यह समुंद्र में करीब 4 किलोमीटर गहराई में समा गया। इस त्रासदी
में लगभग 1500 लोगों की जान गई यह उस समय की सबसे बड़ी
समुद्री दुर्घटना थी। लगभग 70 सालों तक टाइटैनिक का मलबा समुद्र में 4 किलोमीटर नीचे पढ़ा रहा, जिसे पहली बार 1985 में रोबट बलाड और उनकी टीम ने खोज निकाला था। खोजकर्ताओ का कहना था की जहां जहाज डूबा हुआ है, वहां चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है। समुद्र की गहराई में तापमान भी 1 डिग्री सेल्सियस है।
इन विपरीत
परिस्थितियों का सामना करते हुए किसी इंसान का इतनी गहराई में जाना और फिर वापस
लौट कर आना बहुत जोखिम भरा होता है। ऐसे में यहां से मलबे को निकाल कर लाना तो
बहुत दूर की बात है। समुद्र की गहराई में 4 किलोमीटर नीचे पड़े मलबे को विपरीत
परिस्थितियों का सामना करते हुए बाहर निकालना लगभग नामुमकिन है। विशेषज्ञों के
मुताबिक, टाइटैनिक का मलबा समुद्र में अब तेजी से
गल रहा है। ऐसे में उसे बाहर निकाल कर भी कोई फायदा नहीं होगा।
बताया जाता है कि
आने वाले 20 से 30 सालों में टाइटैनिक का मलबा पूरी तरह गल
जाएगा और समुद्र के पानी में घुल जाएगा। समुद्र में पाए जाने वाले बैक्टीरिया
टाइटैनिक के लोहे को तेजी से खा रहे हैं,जिस वजह से उस में जंग लग रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार,ये समुद्री बैक्टीरिया रोजाना लगभग 180 किलो मलबा खा जाते हैं। ऐसे में टाइटैनिक की उम्र
अब ज्यादा नहीं बची है, इसलिए इसके मलबे को बाहर निकालना समझदारी नहीं होगी।