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- पीएम चेहरे को लेकर विपक्ष की आपस में रार..
Posted by : achhiduniya
10 June 2023
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए से अलग होकर
विपक्षी गठबंधन को एकजुट करने में लगे हैं। इसके लिए वो पिछले कई महीनों से कई
प्रमुख दलों के नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि वो चाहते हैं कि
विपक्ष उन्हें अपनी तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करे। हालांकि वो कई
मौकों पर विपक्ष की ताकत को मजबूत करने की वकालत कर चुके हैं। महागठबंधन को लेकर 23 जून को देशभर के प्रमुख विपक्षी दल बिहार की राजधानी पटना में मीटिंग करने जा
रहे हैं। विपक्ष के लिए यह मीटिंग को 2024 लोकसभा
चुनाव के लिए अहम मानी जा रही है। हालांकि शरद पवार का एक ताजा बयान विपक्षी एकता
को कमजोर कर भी सकता है। एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा है कि विपक्षी गठबंधन में 2024 लोकसभा चुनाव के लिए पीएम पद पर नाम की घोषणा चुनाव बाद होगी। पवार के इस बयान
के बाद नीतीश कुमार और ममता बनर्जी की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। शरद पवार ने
कहा कि हम गठबंधन में चुनाव से पहले पीएम पद पर बात नहीं करेंगे। चुनाव के बाद ही
पीएम पद को लेकर फैसला होगा। महागठबंधन के स्वरूप को देखें तो नीतीश कुमार के
नेतृत्व में गठबंधन बनता दिख रहा है, लेकिन
इसमें भी कई दल ऐसे हैं जो नीतीश के नाम पर साथ आने से कतरा रहे हैं। वहीं कई दल
ऐसे भी हैं जो कांग्रेस की अगुवाई में चुनाव नहीं लड़ना चाहते। राज्य स्तर पर तमाम
विपक्षी दल एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं।
कांग्रेस की अगुवाई में लड़ने के खिलाफ
कुछ दलों का कहना है कि जिस राज्य में जो दल मजबूत हो, वहां उसी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाए। ममता बनर्जी तीसरे मोर्चे को भी खड़ा करती देखी गई हैं। इसमें तेलंगाना सीएम केसीआर भी उनके साथ खड़े नजर आ
रहे हैं। वहीं ममता बनर्जी ने एक रैली में यहां तक कहा था कि मैं अपने एक पैर पर
खड़ी हो कर बंगाल जीतूंगी और भविष्य में अपने दोनों पैरों पर खड़ी होकर दिल्ली में
जीत दर्ज करूंगी। 23 जून को बिहार में होने वाली
मीटिंग में आप से अरविंद केजरीवाल, JDU से नीतीश
कुमार, टीएमसी से ममता बनर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन
खड़गे, राहुल गांधी, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, झारखंड से हेमंत सोरेन, तमिलनाडु से एमके स्टालिन, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे व अन्य कई दल
हिस्सा लेंगे। राकांपा चीफ शरद पवार का बयान कि पीएम पद पर फैसला चुनाव बाद
होगा, विपक्षी एकता को कमजोर भी कर सकता है।