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- लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं है तलाक मांगने का हक..कोर्ट
Posted by : achhiduniya
13 June 2023
केरल हाईकोर्ट ने
कहा कि जब दो लोग केवल एक समझौते के आधार पर साथ रहने का फैसला करते हैं, तो वे विवाह होने का दावा नहीं कर सकते हैं और न ही
इसमें तलाक की मांग कर सकते हैं। कानूनी मामलों को रिपोर्ट करने की वेबसाइट बार
एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक और सोफी थॉमस की बेंच
ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर यह टिप्पणी की। दोनों जजों ने कहा कि लिव-इन
रिलेशनशिप अभी तक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने
कहा कि कानून केवल उन्हें ही तलाक लेने की अनुमति देता है, जो किसी पर्सनल लॉ या विशेष विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह बंधन में
बंधे हैं। अदालत ने यहां यह भी
दोहराया कि कानून अभी तक लिव-इन रिलेशनशिप को विवाह
के रूप में मान्यता नहीं देता है। कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि विवाह एक सामाजिक
प्रथा है, जिसे कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है और यह समाज
में सामाजिक और नैतिक आदर्शों को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि तलाक
केवल कानूनी शादी को खत्म करने का एक जरिया मात्र है। लिव-इन रिलेशनशिप को अन्य
उद्देश्यों के लिए मान्यता दी जा सकती है, लेकिन तलाक के लिए
नहीं।
कोर्ट ने कहा कि पार्टियों को तलाक की अनुमति तभी दी जा सकती है जब वे विवाह के मान्यता प्राप्त रूपों के अनुसार विवाहित हों। हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया है कि तलाक को कानून के अनुसार अनुकूलित किया गया है। कुछ समुदायों में अदालत के बाहर होने वाले तलाक को भी वैधानिक कानूनों के जरिये मान्यता प्राप्त है और तलाक के अन्य सभी रूप वैधानिक प्रकृति के हैं।
हाईकोर्ट
ने कहा कि जब दो लोग बस एक समझौते के माध्यम से साथ रहने का फैसला करते हैं और
किसी मान्यता प्राप्त कानून के तहत बंधन में नहीं बंधते तो वे विवाहित होने का
दावा नहीं कर सकते और न ही तलाक ले सकते हैं।