- Back to Home »
- Politics »
- क्या चाचा-भतीजा पका रहे भाजपा को घुल चाटने की खिचड़ी..? बगावत के दो हफ्ते बाद भी 4 मुलाकाते 2 बैठके क्यू..?
क्या चाचा-भतीजा पका रहे भाजपा को घुल चाटने की खिचड़ी..? बगावत के दो हफ्ते बाद भी 4 मुलाकाते 2 बैठके क्यू..?
Posted by : achhiduniya
18 July 2023
NCP के बागी
नेता अजित पवार को एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में
शामिल हुए करीब दो हफ्ते से ज्यादा वक्त हो गया है। अब महाराष्ट्र के राजनीतिक
हलकों में यह सवाल घूम रहा है कि आखिर चाचा [शरद पवार] और भतीजे [अजित पवार]
ने सोमवार को वाईबी चव्हाण केंद्र में इतने दिनों
में अपनी दूसरी बैठक क्यों की.? जिसके बाद दोनों पक्षों के विधायक हैरान हैं। एकनाथ शिंदे ने जब सार्वजनिक तौर पर शिव सेना से अलग होने की ठानी और
उसे छोड़ने का फैसला लिया। उसके बाद उन्होंने कभी उद्धव ठाकरे के साथ कोई बैठक
नहीं की। फिर अजित पवार आखिर क्यों शरद पवार से इतनी बार और लगातार मिल रहे हैं। इससे
भी
जरूरी बात आखिर एक मजबूत मराठा नेता अपने भतीजे से क्यों मिल रहे हैं, जिसने उन्हें पार्टी
के नेतृत्व से सेवानिवृत्ति की सलाह दी। 2 जुलाई को आठ अन्य
विधायकों के साथ सरकार में शामिल होने के बाद से ही अजित पवार ने एनसीपी को एक
इकाई के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जबकि यह दावा किया
जा रहा है कि उनके पास ज्यादातर विधायकों का समर्थन है।
बताया जा रहा है कि रविवार की बैठक में, अजित
पवार गुट ने सीनियर पवार से मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता खोजने का
आग्रह किया और उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन मांगा। सूत्रों के अनुसार सोमवार को अजित पवार गुट के लगभग 30 विधायकों
ने इसी अनुरोध के साथ शरद पवार से मुलाकात की थी। पवार परिवार के कभी गर्म तो कभी
नरम रवैये ने दोनों तरफ के खेमों में निराशा पैदा कर दी है। सूत्रों का कहना है कि
नेता अब स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। वहीं अजित पवार खेमे के सूत्रों के अनुसार रविवार की बैठक के बाद खेमे के कुछ विधायक नाराज
थे। दूसरी तरफ एक अंदरूनी सूत्र ने जानकारी दी है,नाराज
विधायकों में से ज्यादातर की राय यही थी कि अगर वरिष्ठ नेता, शरद पवार के साथ समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने दूरी क्यों बनाई।
कांग्रेस
के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि, शरद पवार की चुप्पी उनके गुप्त पत्ते खेलने की फितरत भी हो सकती
है,लेकिन कहीं अगर विधायक इसे राजनीतिक थकान के संकेत के रूप में देखते हैं और वह
अजित पवार खेमे का हाथ थाम लेते हैं तो यह चुप्पी उन्हें महंगी पड़ सकती है। महाराष्ट्र
राकांपा अध्यक्ष जयंत पाटिल ने सोमवार को दावा किया कि वरिष्ठ नेता ने अपने भतीजे
के गुट से पूछा कि वर्तमान राजनीतिक हालात में कोई रास्ता कैसे खोजा जा सकता है, जबकि वे लोग पहले ही सार्वजनिक
रूप से अपना रुख साफ कर चुके हैं। शरद पवार के स्थिति को संभालने और अजित पवार के
साथ लगातार बैठक ने रांकपा के पहले परिवार में कांग्रेस और शिव सेना–यूबीटी के
समीकरण को भी असहज स्थिति में खड़ा कर दिया है।