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- 10 हजार फेसबुक पेज पर प्रचार प्रशांत किशोर कर सकते है नई पार्टी का ऐलान...
Posted by : achhiduniya
30 August 2023
उत्तर बिहार की 20 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी प्रशांत
किशोर की टीम कर रही है। लोगों से सीधा संपर्क बनाने के लिए 3 तरह की रणनीति अपनाई जा
रही है। ग्राम स्तर पर 18 से 20 साल के युवाओं को साधने के लिए क्लब बनाया जा
रहा है। इसे क्लब कमेटी नाम दिया गया है। इन क्लबों में खेल के सामान रखवाए गए हैं।
टेलीविजन की भी व्यवस्था की गई है। 20 साल से ऊपर के छात्रों
को साधने के लिए युवा कमेटी बनाई गई है, जो विश्विद्यालय और कॉलेज में एक्टिव है। परीक्षा
और बेरोजगारी का मुद्दा इन कमेटी को उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। महिलाओं की
बुनियादी मुद्दे को उठाने के लिए ग्राम स्तर पर वुमेन कमेटी को भी सक्रिय किया गया
है। पीके महिलाओं को साधने के लिए उसके बच्चे के भविष्य पर पदयात्रा में ज्यादा
बात करते हैं। जन सुराज सूत्रों के मुताबिक प्रशांत
किशोर की नजर तेजस्वी के युवा और
नीतीश के महिला वोटरों पर हैं। प्रशांत की टीम लगातार उनके भाषण को रील्स के जरिए
इंस्टाग्राम पर प्रमोट भी कर रही है। प्रशांत किशोर के डिजिटल टीम से जुड़े
सूत्रों के मुताबिक प्रचार के लिए सोशल मीडिया का सबसे अधिक सहारा लिया जा रहा है।अब
तक जन सुराज और बात बिहार की पेज के जरिए प्रशांत की
बात को लोगों तक पहुंचाया जा रहा था,लेकिन अब पीके फॉर सीएम पेज भी के जरिए भी सोशल मीडिया पर लोगों को साधा
जा रहा है। पीके
की टीम इस नाम से करीब 10 हजार पेज बनाने की तैयारी में है, जिस पर प्रशांत किशोर के
भाषण और बिहार की बदहाली को दिखाया जाएगा।
चुनाव आयोग के 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक
बिहार में 40 साल से कम उम्र के करीब 4 करोड़ 29 लाख वोटर्स हैं। इनमें 18 से 19 वर्ष वाले 71 लाख वोटर्स, 20 से 29 वर्ष वाले 1 करोड़ 60 लाख वोटर्स और 30 से 39 वर्ष वाले 1 करोड़ 98 लाख वोटर्स हैं। प्रशांत
किशोर कोर टीम के एक सदस्य ने नाम नहीं बताने के शर्त पर बताया कि नई पार्टी में
प्रशांत किशोर की भूमिका मेंटर की रहेगी। किशोर प्रचार की कमान संभालेंगे। पार्टी का जिम्मा किसी दूसरे व्यक्ति को दी
जाएगी। संगठन के भीतर किसी दलित या मुस्लिम को अध्यक्ष बनाने की चर्चा है। बिहार
की सियासत में दलित नीतीश कुमार का और मुस्लिम लालू यादव का वोटबैंक माना जाता है।
पार्टी संगठन का स्ट्रक्चर तृणमूल कांग्रेस की तरह होगा। प्रखंड और जिला स्तर पर
संगठन बनाने की कवायद शुरू भी हो गई है। अब तक पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीवान, सारण और गोपालगंज में
संगठन तैयार भी हो गया है।
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