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- रहस्यमई समुद्री भंवर “इंडियन ओशन ज्यॉइड लो” की चौंकाने वाली सच्चाई आई सामने..?
Posted by : achhiduniya
02 August 2023
भारतीय भू वैज्ञानिक देबांजन पाल और अत्रेयी घोष ने इस रहस्यमयी होल
की स्टडी की है। उन्होंने बताया कि इतने लंबे समय से बने इस होल का राज भी इसके
अंदर है। उन्होंने बताया कि ये ज्यॉइड
लगभग 29 मिलियन साल पहले निर्मित
हुआ होगा, जब हिंद महासागर का
निर्माण हो रहा था। उन्होंने बताया कि इसकी पूरी जानकारी के लिए पृथ्वी के प्लेट
टेक्टोनिक्स की गति के बारे में जानना होगा। पृथ्वी का निर्माण प्लेटों से
मिलकर बना हुआ है, जिसे प्लेट टेक्टोनिक्स कहा जाता है और इन प्लेटों में लगातार गति बनी रहती है, जिसे, प्लेट टेक्टोनिक्स गति कहा जाता है। जब भारतीय उपमहाद्वीप
अफ्रीका से टूट कर बन रहा था, तब जहां पर भारत, हिंद
महासागर और हिमालय हैं.,यहां पर टेथीस सागर हुआ
करता था। इस होल को इंडियन ओशन ज्यॉइड लो के नाम से जाना जाता था। यह 2 लाख स्क्वायर मील में फैला हुआ है
और यह पृथ्वी के ऊपरी भाग से 600 मील यानी 960 किलोमीटर अंदर तक है। ऐसा माना जाता था कि इस क्षेत्र में काफी कम
गुरुत्वाकर्षण पाया जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि
जब हिंद महासागर का निर्माण हुआ तो यहां पृथ्वी के मेंटल के हल्के घनत्व और
द्रव्यमान के पदार्थ बाहर निकलने लगे जिसकी वजह से हिंद महासागर में ऐसे होल का निर्माण
होने लगा। दरअसल इन क्षेत्रों में गुरुत्वाकर्षण काफी कम होता। वहीं, इन
शोधकर्ताओं का मानना है कि जब तक मेंटल से पदार्थ निकलते रहेंगे, तब तक ये
होल बने हुए रहेंगे।
दरअसल ये हल्के पदार्थ
पृथ्वी के जिस मेंटल के भाग से आ रहे हैं वे कुछ और नहीं बल्कि लाखों साल पहले दबे
हुए टेथीस सागर के हिस्से हैं। हिंद महासागर में साल 1948 में मिला एक विशालकाय होल रहस्य का विषय बना हुआ था।
इस होल की खोज डच जियोफिजिसिस्ट फेलिक्स एंड्रीज वेनिंग मैनेज ने की थी,लेकिन अभी
हाल में भारतीय वैज्ञानिकों ने
इसका रहस्य सुलझाया है।
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