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- रायबरेली से सोनिया गांधी व मैनपुरी से डिंपल यादव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती.....
Posted by : achhiduniya
29 August 2023
रायबरेली कांग्रेस का मजबूत किला है वहीं मैनपुरी समाजवादी
पार्टी का किला है। इन दोनों किले को भेदने के लिए बीजेपी को दमदार प्रत्याशी की
तलाश करनी पड़ेगी। हालांकि अभी
उम्मीदवारों के नाम तय होने में काफी समय बचा है मगर आइएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक
बीजेपी जिन सीटों पर साल 2019 में चुनाव हारी थी वहां
प्रत्याशियों के नाम का ऐलान पहले कर सकती है। पार्टी का कहना है कि इससे उन
उम्मीदवारों को चुनावी तैयारी करने के लिए ज्यादा समय मिल जाएगा। पिछले दो लोकसभा
चुनाव से कांग्रेस और सपा
बीजेपी के खिलाफ लामबंध है। इसलिए समाजवादी पार्टी
कांग्रेस की प्रत्याशी सोनिया गांधी के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतार रही है। अब तक यहां हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव और 3 उपचुनाव
में कांग्रेस का ही परचम लहराता रहा है। इन चुनावों में कांग्रेस को 16 बार जीत हासिल हुई है। जबकि तीन बार उसे मात मिली है। पिछले 2019 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी ने कभी अपनी पार्टी और
परिवार के खास रहे बीजेपी के दिनेश सिंह को 1 लाख 67 हजार वोटों से हराया था। मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी बनाई।
तब से लेकर अब तक अधिकांशतः इस पर मुलायम सिंह परिवार का ही कब्जा रहा। बीच में बलराम सिंह यादव ने भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।1996 में मुलायम सिंह पहली बार यहां से लोकसभा चुनाव जीते थे। इसके बाद 1998 और 99 में बलराम सिंह ने सपा से चुनाव लड़कर जीता था। फिर मुलायम सिंह यहां से जीते और इस्तीफा भी दिया। 2014 में मोदी लहर के बावजूद मुलायम सिंह ने यहां बीजेपी के खिलाफ 3,64,666 वोटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद उऩ्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। मुलायम सिंह के निधन के बाद यहां 2022 में हुए उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम सिंह की बहू डिंपल यादव मैदान में उतरी थीं। उन्होंने 2.88 लाख वोटों से जीत हासिल की थी।
डिंपल को 6,18,120 वोट मिले थे जबकि बीजेपी के
रघुराज सिंह शाक्य को 3,29,659 वोट प्राप्त हुए थे। उत्तर प्रदेश
में सर्वाधिक 80 लोकसभा सीटें हैं। हालिया सर्वेक्षण में
बीजेपी को यहां 70 सीटें मिलने का अनुमान बताया जा रहा
है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में दो प्रमुख पर्टियों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी
की गढ़ कही जाने वाली दो सीटें हैं जहां के लिए बीजेपी को प्रत्याशी ढूंढने में ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है।

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