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- पत्नी से दूरी के चलते पति का दूसरी महिला से संबंध गलत नहीं....दिल्ली हाईकोर्ट
Posted by : achhiduniya
17 September 2023
दिल्ली हाईकोर्ट में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ केस कर
आरोप लगाया कि उसका पति किसी दूसरी महिला के साथ रहता है। महिला की शादी साल 2003 में हुई थी लेकिन दोनों 2005 में
अलग-अलग रहने लगे थे। वहीं, पति ने ये आरोप लगाया कि पत्नी ने
उसके साथ क्रूरता की है और अपने भाई और रिश्तेदारों से उसकी पिटाई भी करवाई है। इस
मामले में केस करने वाली पत्नी ने पति पर आरोप लगाया कि उसके घरवालों ने उनकी शादी
भव्य तरीके से की थी। इसके बावजूद पति ने उसके परिवार से कई तरह की डिमांड की। उसने
आरोप में ये भी कहा कि उसकी सास ने उसे कुछ दवाइयां इस आश्वासन से दी थीं कि लड़का
पैदा होगा, लेकिन उनका मकसद उसका गर्भपात कराना था।
हालांकि इस जोड़े के दो बेटे हैं। केस की सुनवाई के दौरान ये तथ्य सामने आया कि
दोनों कई सालों से
अलग-अलग रह रहे हैं। इस दौरान पति किसी दूसरी महिला के साथ रहने
लगा है। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि यदि कोई जोड़ा लंबे समय तक
एक-दूसरे के साथ नहीं रहता है और उन दोनों के फिर मिलने की कोई संभावना नहीं है। इन
हालात के बीच पति को किसी अन्य महिला के साथ सुकून और शांति से रहने लगा है तो इसे
क्रूरता नहीं कहा जा सकता है।
न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा,भले ही यह स्वीकार कर लिया जाए कि तलाक की याचिका लंबित होने के दौरान प्रतिवादी-पति ने दूसरी महिला के साथ रहना शुरू कर दिया है और उनके दो बेटे हैं, इसे अपने आप में, इस मामले की विशिष्ट परिस्थितियों में क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। जब दोनों पक्ष 2005 से साथ नहीं रहे हैं और अलगाव के इतने लंबे वर्षों के बाद पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है और प्रतिवादी पति को किसी अन्य महिला के साथ रहकर शांति और सकून मिलता है तो इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता है।
साथ ही इस
मामले में ये भी कहा गया कि इस तरह के संबंध का परिणाम प्रतिवादी पति, संबंधित महिला और उसके बच्चों को भुगतान देना होगा। आईपीसी की
धारा 494 में हिंदू मैरिज एक्ट के तहत किसी भी पुरुष या महिला का अपने
जीवनसाथी के जीवित रहते हुए (अगर तलाक नहीं हुआ है) दूसरी शादी करना अपराध है भले
ही पति या पत्नी ने इसकी इजाजत दी हो। अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(आईए) के तहत क्रूरता के आधार पर
पति को तलाक देने के पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली महिला की याचिका
खारिज कर दी।
साथ ही अदालत ने ये भी कहा कि भले ही पत्नी ने दावा किया था कि उसे
दहेज के लिए उत्पीड़न और क्रूरता का शिकार होना पड़ा है, लेकिन वो अपने दावे को साबित नहीं कर पाई और यह क्रूरता का कृत्य
है। अदालत ने ये भी आदेश दिया कि महिला ने शादी के बाद दो बेटों को जन्म दिया, लेकिन महिला ने पति की दूसरी शादी का न तो कोई विवरण दिया, न ही कोई सबूत अदालत में पेश किया और न ही पुलिस में शिकायत
दर्ज करवाई। हाईकोर्ट ने महिला की अपील
खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के तलाक देने के आदेश को जारी रखा है। इस मामले की
सुनवाई न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ में हो रही थी।
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