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- मराठा आरक्षण में कुनबी-ओबीसी आरक्षण का पेंच महाराष्ट्र को मणिपुर बनाने की तो नहीं है साजिश...?
Posted by : achhiduniya
12 September 2023
बीते 1 सितंबर को अपनी मांग
को उठाते हुए किए गए मराठा आरक्षण प्रदर्शन में मराठाओं पर जालना में पुलिस ने लाठी
चार्ज कर दिया था। जिससे कई लोग घायल हुए वहीं कुछ जगहों पर असामाजिक तत्वों
द्वारा गाड़ियों को आग के हवाले कर हिंसा फैलाने की कोशिश की गई। समय रहते उन पर काबू
पा लिया गया। महाराष्ट्र
में मराठा आरक्षण को लेकर ये पहला आंदोलन या प्रदर्शन नहीं है। इस राज्य में लगभग 32 साल पहले मथाडी लेबर
यूनियन के नेता अन्नासाहेब पाटिल ने मुंबई में आरक्षण की मांग की थी। उसके बाद साल
2023 में 1 सितंबर से एक बार फिर यह
मुद्दा गर्म हो गया और मराठा समुदाय ओबीसी आरक्षण की मांग करने लगें। जालना वही
जगह है जहां जारांगे-पाटिल भूख हड़ताल पर बैठे थे। राज्य में ये मांग दशकों पुरानी
है,लेकिन अब तक इस मसले पर कोई स्थायी
समाधान नहीं निकल सका है। हालांकि साल 2014 में सीएम पृथ्वीराज
चव्हाण की सरकार ने नारायण राणे आयोग की सिफारिशों पर मराठों को 16 % आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश पेश किया था। साल 2018 में व्यापक विरोध के बाद
भी राज्य सरकार ने मराठा समुदाय को 16%
रिजर्वेशन आरक्षण देने का निर्णय लिया। जिसके बाद बंबई हाईकोर्ट ने 16% को घटाकर नौकरियों में 13% और शैक्षणिक संस्थानों में 12% कर दिया। साल 2021 में सर्वोच्च न्यायलय ने राज्य सरकार के इस कदम को
रद्द कर दिया।
अब एक बार फिर माराठाओं का विरोध देखते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
ने घोषणा की थी कि मध्य महाराष्ट्र क्षेत्र के मराठा अगर निजाम युग से कुनबी के
रूप में रजिसटर्ड प्रमाण पत्र पेश कर दें तो वे ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ
उठा सकते हैं। महाराष्ट्र में कुनबी खेती-बाड़ी से जुड़ा समुदाय है जिसे ओबीसी में
शामिल किया गया है। इन लोगों को सरकारी नौकरियों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में
आरक्षण मिलता है। मराठवाड़ा क्षेत्र महाराष्ट्र का हिस्सा बनने से पहले तत्कालीन
हैदराबाद रियासत में शामिल था। एक तरफ जहां पिछले कुछ दिनों में मराठाओं ने आरक्षण
की मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया।
वहीं दूसरी तरफ इस समुदाय को ओबीसी से आरक्षण
देने की मांग पर ओबीसी के नेता आक्रामक हो गए हैं। उन्होंने मराठा समुदाय को ओबीसी
से आरक्षण दिए जाने का कड़ा विरोध किया है वहीं दूसरी तरफ मराठाओं को ओबीसी कोटे
से आरक्षण देने की मांग को देखते हुए नागपुर में ओबीसी समुदाय के लोग भी मराठाओं
को आरक्षण देने के विरोध में सड़क पर उतर आए है। महाराष्ट्र में मराठा-ओबीसी
आरक्षण का मामला एकनाथ शिंदे सरकार की गले की हड्डी बन चुका है। राज्य में पिछले
कई दिनों से मराठा समुदाय आरक्षण को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे थे।
दरअसल आज से 15 दिन पहले मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे मराठाओं को
कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देकर ओबीसी कोटे से आरक्षण देने की मांग को लेकर अनशन
पर बैठे थे। आरक्षण का ये मांग राज्य के अन्य हिस्सों में भी पहुंच चुकी थी। इस
बीच राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, इस बैठक में मराठा
समुदाय के आरक्षण को लेकर कानूनी से लेकर हर पहलू पर चर्चा की गई और मराठा समुदाय
को आरक्षण देने पर सर्वदलीय सहमति बन गई है। बैठक में महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ
शिंदे ने कहा कि इस आरक्षण को अन्य समाज के आरक्षण में छेड़छाड़ किए बिना लागू किया जाएगा।
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