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फिल्मों में बलात्कारी का एनकाउंटर समाज में न्यायपालिका के प्रति गलत संदेश,सिंघम जैसी फिल्में समाज के लिए घातक...कोर्ट
Posted by : achhiduniya
23 September 2023
इंडियन पुलिस फाउंडेशन द्वारा अपने वार्षिक दिवस और पुलिस
सुधार दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में न्यायमूर्ति पटेल ने कानून की प्रक्रिया
के प्रति लोगों की व्यग्रता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि ‘दबंग, भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार’ की है और न्यायाधीशों, नेताओं और पत्रकारों सहित अन्य के बारे में भी यही कहा जा
सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि जब जनता सोचती है कि अदालतें अपना काम नहीं कर रही
हैं, तो पुलिस के कदम उठाने पर वह जश्न मनाती है। उन्होंने कहा, यही
कारण है कि जब बलात्कार का एक आरोपी कथित तौर पर भागने की कोशिश करते समय मुठभेड़
में मारा जाता है, तो लोग सोचते हैं कि यह न
सिर्फ
ठीक है, बल्कि इसका जश्न मनाया जाता है। उन्हें
लगता है कि न्याय मिल गया है,उन्होंने कहा,फिल्मों में, पुलिस जजों के खिलाफ कार्रवाई करती है, जिन्हें विनम्र, डरपोक, मोटे चश्मे वाले और
अक्सर बहुत खराब कपड़े पहने हुए दिखाया जाता है। वे अदालतों पर दोषियों को छोड़
देने का आरोप लगाते हैं। हीरो के रोल में पुलिस अकेले ही न्याय करती है। पटेल ने
कहा कि यदि इस प्रक्रिया को शॉर्टकट फेवर में छोड़ दिया गया तो हम कानून के शासन को नष्ट
कर देंगे।
न्यायाधीश पटेल ने कहा, सिंघम
फिल्म में विशेष रूप से उसके क्लाइमेक्स में दिखाया गया है कि पूरा पुलिस बल
प्रकाश राज अभिनीत नेता पर टूट पड़ता है और दिखाया गया है कि अब न्याय मिल गया है,लेकिन
मैं पूछता हूं, क्या मिल गया। उन्होंने कहा कि हमें
सोचना चाहिए वह संदेश कितना खतरनाक है। बॅाम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश गौतम
पटेल ने शुक्रवार को कहा कि कानूनी प्रक्रिया की परवाह किए बिना त्वरित न्याय करने
वाले नायक पुलिसकर्मी की सिनेमाई छवि एक बहुत ही खतरनाक संदेश देती है, जैसा कि सिंघम फिल्मों में दिखाया गया है।
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