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- खतरे समस्याए ग्लोबल तो निपटने का तरीका भी ग्लोबल होना चाहिए..पीएम मोदी
Posted by : achhiduniya
23 September 2023
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेरे पास काम भी बहुत है और समय भी बहुत है। कानून
को जनता की भाषा तक
लाने में 75 साल लग गए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस को बधाइयां। कानून को सरल
बनाने के लिए इतना समय लगा तभी मुझे आना पड़ा। 21वीं सदी में हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जो डिपली कनेक्टेड हैं,लेकिन
आज भी कई ताकते हैं, जिनके खिलाफ हम लड़ रहे हैं। वो बॉर्डर की परवाह नहीं
करते हैं। जब खतरे ग्लोबल हैं, तो उनसे निपटने का तरीका भी ग्लोबल होना चाहिए। साइबर
क्राइम हो, मनी
लॉन्ड्रिंग हो एआई हो इन सबके लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क तैयार करना सिर्फ किसी एक
सरकार का काम नहीं हो सकता है। इसके लिए
सभी देश को एक साथ जुड़ना होगा। जैसे हम
एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए मिलकर काम करते हैं, वैसे ही हमें अलग-अलग डोमेन में ग्लोबल फ्रेम वर्क
तैयार करना ही पड़ेगा। पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी देश की जीवन शैली और संस्कृति
में न्यायिक समाज की अहम भूमिका होती है। भारत की आजादी के आंदोलन में भी कई बड़े
वकीलों ने राष्ट्रीय आंदोलन में अपनी चलती वकालत छोड़ दी थी। अधिकतर बड़े
स्वाधीनता सेनानी वकील थे।
उन्होंने उस समय भी और आजादी के बाद भी न्यायिक पेशे से
जुड़े वकीलों ने देश के विकास की नींव मजबूत की। प्रधानमंत्री मोदी ने
अंतरराष्ट्रीय अधिवक्ता सम्मेलन में कहा कि किसी भी देश की जीवन शैली और संस्कृति
में न्यायिक समाज की अहम भूमिका होती है।
एक तरह से ये कॉन्फ्रेंस वसुधैव
कुटुम्बकम की भारत की भावना का प्रतीक बन गई है। मैं यहां आए
सभी अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का भारत में बहुत बहुत स्वागत करता हूं। नारी शक्ति
वंदन कानून का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा,ये कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हो रहा है, जब भारत में कुछ ही दिन
पहले संसद से पारित नारी शक्ति वंदन कानून पास हुआ है।
इस कानून में महिलाओं के
लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का
प्रावधान है। ये कानून देश में महिला आधारित विकास को नई दिशा देगा, नई ऊर्जा देगा। जी20 शिखर सम्मेलन ने भारत
की नई चमक दुनिया के सामने बिखेरी। ठीक महीने भर पहले चंद्रयान सफलता से उतरा। विकसित
भारत में न्यायिक सुलभता और सबको न्याय के नए तौर तरीके हमें दुनिया की अगली कतार
में खड़ा करेंगे।
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