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- जकात का पैसा हड़प कर जिहाद की आड़ में अय्याशी पाक सेना का खौफनाक चेहरा...इनसाइड स्टोरी
Posted by : achhiduniya
20 September 2023
खुफिया
सूत्र के अनुसार पाक सेना के जनरल्स ने जिहाद
के नाम पर आतंकी संगठनों के जरिये एक नेक्सस तैयार किया है, जिसका
इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। पाक सेना के जनरल्स दक्षिणी पंजाब जैसे पिछडे़
इलाकों से जिहाद के नाम पर गरीब परिवार के बच्चों को महज 30 से
40 हजार
रुपये में खरीदते हैं। ऐसे बच्चों को ट्रेनिंग देने के साथ पहले दिन से बताया जाने
लगता है कि भारतीय फौज काफिर है। उनसे बदला लेना। ट्रेनिंग के बाद सिर्फ एक
प्रतिशत को पाक सेना में जगह मिल पाती है,अलग-अलग इलाकों में भेज दिया
जाता है। सबसे
पसंदीदा इलाका कश्मीर है। सूत्र के अनुसार LoC पर
तैनाती के भी अलग फायदे हैं। उदाहरण के तौर पर 10 जिहादियों को एलओसी पर भेजा
गया और सब मर गए तो इन्हें शहीद करार दे दिया जाता है। शहीद घोषित होने के बाद
इन्हें बड़े पैमाने पर जकात (डोनेशन) मिलती है। यह पैसा लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद
और हिजबुल की टॉप लीडरशिप हड़प कर जाती है। बड़ा हिस्सा पाकिस्तानी सेना के
जनरल्स को भी जाता है। जकात के अलावा दूसरा फायदा यह है कि इससे दूसरे लोग भी अपने
बच्चों को जिहादी मिशन पर भेजने को तैयार हो जाते हैं। इन्हीं पैसों से पाक जनरल्स
ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं.। अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं। पाकिस्तानी
सेना के इतिहास पर नजर डालें तो मोहम्मद अयूब खान से लेकर टीका खान और याह्या खान
जैसे जनरल्स, अपने स्वार्थ के लिए धर्म का इस्तेमाल करते आए हैं।
पाकिस्तानी सेना में, सिविलियंस को जगह देते रहे हैं। पाकिस्तान के ज्यादातर सेना प्रमुख रिटायरमेंट के बाद अपने ज्यादा दिन अपने देश में नहीं टिक पाए। चाहे परवेज मुशर्रफ हों, अशफाक कियानी हों या ISI के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद पाशा या जनरल असीम बाजवा। असीम बाजवा के परिवार वालों ने तो कुछ सालों के अंदर पाकिस्तान के तमाम पॉश इलाकों में बड़े-बड़े फार्म हाउस खरीद लिये। विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदी और तमाम बिजनेस में भी पैसा लगा दिया। बाजवा से विदेश में निवेश के मामले पर पूछताछ भी हो चुकी है। खुफिया सूत्र की माने तो हाफिज सईद हर साल डोनेशन के नाम पर तकरीबन 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक ऐंठ लेता है और इसका ज्यादा हिस्सा पाकिस्तान सेना के पास जाता है।
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े जकीउर रहमान, साजिद मीर और रऊफ असगर जैसे
लोग रावलपिंडी- बहावलपुर में मजे की जिंदगी जी रहे हैं। इनके पास चार-पांच करोड़
तक की गाड़ियां है और हर एक के काफिले में इस तरह की 20 से
ज्यादा गाड़ियां हैं। एक तरीके से यह दोनों, पाक जनरल्स और आंतकी संगठनों
के लिए फायदे का सौदा है।
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